
Mumbai , 15 अप्रैल . Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने Wednesday को कहा कि महिला आरक्षण बिल में संशोधन इसलिए जरूरी थे ताकि इस कानून को समय पर लागू किया जा सके, क्योंकि जनगणना में देरी की वजह से परिसीमन का शेड्यूल बिगड़ गया था.
सीएम फडणवीस ने कहा कि जैसा कि सभी जानते हैं, जनगणना की प्रक्रिया में देरी हुई, और इसी वजह से परिसीमन का शेड्यूल भी गड़बड़ा गया. ऐसी स्थिति में महिलाओं का आरक्षण 2034 या 2039 तक भी टल सकता था. अगर Political इच्छाशक्ति न होती, तो कोविड-19 महामारी की वजह से हुई देरी का बहाना बनाकर इसे अनिश्चित काल के लिए टाला जा सकता था. वे यहां एक कार्यक्रम में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा करते हुए बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि अब यह तय हो गया है कि परिसीमन का काम एक साल के अंदर पूरा कर लिया जाएगा, और इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि मौजूदा जनगणना के नतीजों का इंतजार न करना पड़े. इन बदलावों की वजह से, महिलाओं के लिए आरक्षण 2029 के आम चुनावों से ही लागू हो जाएगा और इसे आगे नहीं टाला जाएगा.
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी पार्टियां आरक्षण कानून का समर्थन करने का दावा करने के बावजूद परिसीमन का विरोध कर रही हैं. “वे कहते हैं कि वे महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि परिसीमन का विरोध कर रहे हैं. वे जानते हैं कि अगर परिसीमन लागू नहीं हुआ, तो महिलाओं के लिए आरक्षण भी लागू नहीं हो पाएगा. ऐसे लोग असल में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का ही विरोध कर रहे हैं.
Chief Minister ने विश्वास जताया कि इन बदलावों से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि आरक्षण नीति का असर 2029 के आम चुनावों से ही दिखने लगेगा. उन्होंने कहा, “हालांकि आरक्षण बिल में 33 प्रतिशत का कोटा दिया गया है, लेकिन मेरी बात याद रखना, अगली Lok Sabha में लगभग 40 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होंगी. उनकी आवाज को और भी ज्यादा ताकत मिलेगी.
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