
New Delhi, 10 अप्रैल . कांग्रेस द्वारा महिला आरक्षण बिल को लेकर की जा रही बयानबाजी पर Union Minister धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि India की महिलाओं को परिणाम चाहिए, न कि ऐसे वादे जो बार-बार किए जाएं लेकिन कभी जमीन पर न उतरें.
धर्मेंद्र प्रधान ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मल्लिकार्जुन खड़गे, महिला आरक्षण किसी Political श्रेय का विषय नहीं है, यह महिलाओं की गरिमा, प्रतिनिधित्व और उनके उचित सशक्तिकरण का विषय है. India की महिलाओं को परिणाम चाहिए, न कि ऐसे वादे जो बार-बार किए जाएं लेकिन कभी जमीन पर न उतरें.
उन्होंने लिखा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (2023) कांग्रेस की अचानक किसी मांग का परिणाम नहीं था. यह Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में लाया गया और लागू किया गया, जबकि इससे पहले कई दशकों तक यह मुद्दा चर्चा में तो रहा, लेकिन कभी हल नहीं हुआ. 25 से अधिक वर्षों तक महिलाओं के लिए आरक्षण का विषय अधूरा वादा बना रहा. बार-बार चर्चा हुई, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया.
कांग्रेस अध्यक्ष को जवाब देते हुए उन्होंने आगे लिखा कि संसद ने अब 106वां संविधान संशोधन पारित कर Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान किया है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं. यह अब केवल प्रस्ताव या इरादा नहीं है; यह India के संविधान का हिस्सा बन चुका है.
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि इसके क्रियान्वयन को लेकर आपकी चिंता नोट की गई है. हालांकि, यह संशोधन स्पष्ट रूप से इसे जनगणना के बाद होने वाली अगली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ता है. यह Political पसंद का विषय नहीं है, बल्कि India के संघीय संतुलन और प्रतिनिधित्व में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक संवैधानिक आवश्यकता है.
Union Minister ने आगे लिखा कि Government का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों तक महिला आरक्षण को लागू करना है. इसके लिए परिसीमन और विधानसभाओं की संरचना में आवश्यक बदलाव जैसे कदम उठाने होंगे. परिसीमन और सीटों के विस्तार पर Government संवेदनशीलता को ध्यान में रख रही है. उन्होंने कहा कि उद्देश्य प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है ताकि महिलाओं को विधानसभाओं में उचित स्थान मिले.
धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस अध्यक्ष से कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है तो यह समय है कि वह संसद में रचनात्मक रूप से भाग ले, आवश्यक सुधार सुझाए और इस ऐतिहासिक सुधार को बिना और देरी के लागू करने में सहयोग करे.
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी और महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चा की थी. social media पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस बिल को पास कराने की मांग पहले ही कर चुकी है और उनकी पार्टी में महिलाओं को हमेशा से तरजीह दी जाती रही है.
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एएमटी/डीकेपी