
Mumbai , 22 अगस्त . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहना पर जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेशनल मीडिया सेक्रेटरी सलमान अहमद ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने चुनाव आयोग की नहीं बल्कि India में फोटो आईडी की अनिवार्यता की तारीफ की और हमें खुद पर इतना भरोसा होना चाहिए कि अमेरिकी वैलिडेशन की जरूरत न पड़े. साथ ही उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि डेटा से साफ है कि सालों से वोट दे रहे कई असली नागरिकों के नाम भी लिस्ट से बाहर हो गए हैं, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है.
अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहना की. इसे लेकर जमात-ए-इस्लामी के नेशनल मीडिया सेक्रेटरी सलमान अहमद ने कहा, “उन्होंने चुनाव आयोग की सराहना नहीं की. असल में, उन्होंने कहा कि वहां फोटो आइडेंटिफिकेशन जरूरी नहीं है.”
उन्होंने कहा कि उन्होंने एक उदाहरण दिया कि India आबादी के मामले में अमेरिका से बहुत बड़ा देश है, लेकिन उसके बावजूद, वहां फोटो आइडेंटिफिकेशन का इस्तेमाल होता है तो हमारे पास भी होना चाहिए. और अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो यह अच्छी बात है. लेकिन हमें खुद पर इतना भरोसा होना चाहिए कि हमें अमेरिका से वैलिडेशन की जरूरत नहीं है. ऐसा नहीं है कि अमेरिका हमारी सराहना करे तो हम अच्छे हैं और अमेरिका न करे तो बुरे हैं.
एसआईआर को लेकर सलमान अहमद ने कहा, “अभी तक जिन राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां के डेटा से साफ पता चलता है कि हमारे देश के बहुत सारे असली नागरिक, जो सालों से वोट दे रहे थे, उनका नाम एसआईआर रोल में नहीं आ पाया. बंगाल और दूसरे राज्यों के नंबर देखिए. बाद में, प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि कई लोग तकनीकी वजहों से बाहर हो गए. इसमें कोई शक नहीं कि एसआईआर की यह प्रक्रिया खास सफल नहीं रही है.”
जमात-ए-इस्लामी के नेशनल मीडिया सेक्रेटरी सलमान अहमद कहते हैं, “लोकतंत्र में वोट देने का अधिकार एक बहुत ही बुनियादी अधिकार है. तकनीकी वजहों से किसी को भी इस अधिकार से वंचित करना सही नहीं ठहराया जा सकता. अगर किसी को उसके नाम की स्पेलिंग की गलती या किसी और वजह से वोट देने के अधिकार से वंचित किया जाता है तो यह उसके साथ नाइंसाफी होगी और उसके अधिकारों का उल्लंघन होगा.”
उन्होंने आगे कहा कि मेरा मानना है कि यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी वोटर छूट न जाए. वोटर की जिम्मेदारी खुद को साबित करना नहीं है, बल्कि यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि हर योग्य नागरिक अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल कर सके.
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केके/डीकेपी