
अयोध्या, 19 अप्रैल . Lok Sabha से महिला आरक्षण से जुडा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न हो पाने पर अयोध्या के प्रमुख संतों और धर्मगुरुओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान के खिलाफ Political खेल खेलने का आरोप लगाया.
साकेत भवन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सीताराम दास ने कहा, “Prime Minister Narendra Modi महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लेकर आए थे, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे रोकने की कोशिश की. वर्षों से कांग्रेस, Samajwadi Party, टीएमसी और आप सहित इन दलों ने हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ काम किया है. हमारी परंपरा कहती है, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता’—अर्थात् जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां दैवीय शक्तियां निवास करती हैं. इस विधेयक का विरोध करके उन्होंने महिलाओं और देश के मूल्यों के प्रति अपनी नकारात्मक मानसिकता का प्रदर्शन किया है. मैं प्रार्थना करता हूं कि Prime Minister राष्ट्र और उसकी संस्कृति के लिए निरंतर कार्य करते रहें. भविष्य में एक सशक्त जनादेश के साथ इस विधेयक को पुनः प्रस्तुत किया जाएगा और पारित भी कराया जाएगा.”
तपस्वी छावनी के प्रमुख परमहंस आचार्य ने Prime Minister के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “Prime Minister Narendra Modi हर क्षेत्र में महिलाओं के सम्मान और उनकी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. हालांकि, विपक्षी दलों ने महिलाओं के हितों के खिलाफ काम किया है. वे महिलाओं के वोट तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें आगे बढ़ते हुए या सम्मान पाते हुए नहीं देखना चाहते. जब मैंने Prime Minister का भाषण सुना तो वे बहुत भावुक और आहत नजर आए. उनका सपना सभी क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त देखना था, लेकिन वह सपना अब टल गया है.”
आर्य संत वरुण दास ने इस मुद्दे पर कहा, “संसद में महिला आरक्षण विधेयक गिर गया है. इससे पहले भी कई प्रयास किए गए थे, लेकिन महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से लोकतंत्र और मजबूत होगा.”
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, “हमारे देश की परंपराएं, कानून और व्यवस्थाएं—ये सभी इस बात पर जोर देते हैं कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए. महिलाओं को राजनीति में समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि वे समाज के हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकें.”
बता दें कि यह विधेयक महिलाओं के लिए Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ाने से संबंधित था. Government का प्रयास था कि 2029 तक यह आरक्षण प्रभावी हो सके, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह विफल हो गया.
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एससीएच/डीकेपी