पश्चिम बंगाल सरकार ने Supreme Court से ओबीसी आरक्षण मामले की याचिका ली वापस, हाई कोर्ट के फैसले को नहीं देगी चुनौती

New Delhi, 14 जुलाई . पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में 75 मुस्लिम समुदायों समेत 77 जातियों को शामिल किए जाने के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. राज्य की मौजूदा भाजपा Government ने Supreme Court में लंबित वह याचिका वापस ले ली है, जो पूर्ववर्ती ममता बनर्जी Government ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी.

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पश्चिम बंगाल Government की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य कैबिनेट ने इस अपील को वापस लेने का निर्णय लिया है.

इसके बाद Supreme Court ने पश्चिम बंगाल Government के आग्रह को स्वीकार करते हुए उसे याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.

हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी अन्य प्रभावित या पीड़ित पक्ष को कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने से नहीं रोकेगी.

मामला पश्चिम बंगाल में विभिन्न समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किए जाने से जुड़ा है. मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य Government द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए कई ओबीसी प्रमाणपत्रों और आरक्षण संबंधी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था.

हाई कोर्ट ने कहा था कि राज्य में Governmentी सेवाओं और पदों पर आरक्षण देने के लिए जिन समुदायों को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया, उनमें से कई मामलों में धर्म ही प्रमुख आधार प्रतीत होता है.

अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि किसी समुदाय को ओबीसी घोषित करने के लिए निर्धारित संवैधानिक और वैधानिक मानकों का उचित पालन नहीं किया गया. इसी आधार पर संबंधित आरक्षण को अवैध करार दिया गया था.

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्कालीन ममता बनर्जी Government ने Supreme Court का रुख किया था. अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा Government ने उस अपील को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है.

Supreme Court द्वारा याचिका वापस लेने की अनुमति मिलने के बाद फिलहाल राज्य Government की ओर से मामले में कोई कानूनी चुनौती लंबित नहीं रहेगी, हालांकि अन्य प्रभावित पक्षों के लिए अदालत का दरवाजा खुला रहेगा.

एएमटी/एबीएम

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