
New Delhi, 24 मई . राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिले मैदान में जनजातीय सांस्कृतिक समागम में छत्तीसगढ़ के Chief Minister विष्णुदेव साय शामिल हुए, जहां उन्होंने देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से मुलाकात की.
Chief Minister विष्णु देव साय ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जनजातीय समुदाय ने ‘जनजातीय संस्कृति समागम’ का आयोजन किया. हमारे देश में जनजातीय आबादी 12 करोड़ से भी अधिक है, और हम सभी प्रकृति के उपासक हैं. हमारी अपनी विशिष्ट रीति-रिवाज, परंपराएं और संस्कृति है. पिछले कई वर्षों से कुछ धर्म-विरोधी तत्व हमारी परंपराओं को तोड़ने, हमारे रीति-रिवाजों को दबाने और हमारी संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए आज पूरे देश से आए जनजातीय समुदाय अपनी शक्ति और एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं.
सीएम साय ने दिल्ली दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ सदन में वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में आए सर्व ‘आदिवासी समाज’ के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के साथ जनजातीय जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की.
उन्होंने कहा कि हमारी Government आदिवासी समाज के विकास, उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है.
Jharkhand के पूर्व Chief Minister अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज, पूरे देश से आए आदिवासी समुदायों का यह विशाल जमावड़ा न केवल India के आदिवासी समाज को, बल्कि पूरे राष्ट्र को एक सच्चा संदेश देता है. अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं के कारण आदिवासी समुदाय देश में एक अद्वितीय पहचान रखते हैं. वे इस धरती के ऐसे सपूत हैं जिन्होंने हमेशा राष्ट्र के लिए, अपनी जमीन के लिए, और जल, जंगल तथा जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है. अपनी संस्कृति को संरक्षित रखना हमेशा से उनकी एक पुरानी परंपरा रही है, और आज भी आदिवासी समुदाय इस पर गर्व करता है.
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शहरी निवासी, ग्रामीण, वनवासी, हम सभी भारतीय हैं. मैं इस जनजाति सम्मेलन और सभा के आयोजकों को बधाई देता हूं.
केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली में पूरे देश के आदिवासी समुदायों के लोगों का एक आदिवासी सांस्कृतिक समागम आयोजित हो रहा है.
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डीकेएम/डीकेपी