कमजोर मानसून के कारण पानी की चिंताएं बढ़ीं, तमिलनाडु के जलाशयों में जल-भंडारण घटकर 37 प्रतिशत हुआ

चेन्नई, 18 अगस्त . दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर सक्रियता और असामान्य रूप से ज्यादा तापमान के कारण राज्य के जल संसाधनों पर दबाव बना हुआ है, जिसकी वजह से तमिलनाडु के जलाशयों में पानी का भंडार तेजी से कम हुआ है.

Monday तक, जल संसाधन विभाग की निगरानी वाले 90 जलाशयों में कुल मिलाकर 83.124 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था, जो उसकी कुल 224.343 हजार मिलियन क्यूबिक फीट क्षमता का सिर्फ 37.05 प्रतिशत है. बीते वर्ष की तुलना में यह काफी खराब है. बीते वर्ष इसी समय जलाशयों में 189.545 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था.

मौजूदा पानी की मात्रा पिछले साल के स्तर से आधी से भी कम है, जिससे बारिश की कमी की गंभीरता देखी जा सकती है. कई जिलों में सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. सिर्फ तेनकासी जिले का गुंडार जलाशय ही अपनी 18.43 मिलियन क्यूबिक फीट की पूरी क्षमता तक पहुंच पाया है.

ज्यादातर अन्य जलाशय अपनी भंडारण क्षमता से काफी नीचे हैं. 90 जलाशयों में से 58 में 25 प्रतिशत से कम पानी है, 14 में 26 से 50 प्रतिशत के बीच, 15 में 51 से 76 प्रतिशत के बीच और केवल दो में पानी का स्तर 80 प्रतिशत से ऊपर है.

कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए तमिलनाडु के सबसे महत्वपूर्ण जलाशय, मेट्टूर में Monday को 43.275 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था, जो इसकी कुल 93.470 हजार मिलियन क्यूबिक फीट क्षमता का 46.30 प्रतिशत है. पिछले वर्ष इसी समय, इसमें 91.114 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी था, जो इसकी क्षमता का 97.48 प्रतिशत था. मेट्टूर और तिरुचि के बीच कावेरी नदी में पानी की उपलब्धता काफी हद तक सामान्य बनी हुई है.

हालांकि, निचले इलाकों और नदी के आखिरी छोर वाले इलाकों में पानी की भारी कमी है, जिससे पीने के पानी की जरूरतें पूरी करने में भी मुश्किलें आ रही हैं. अधिकारियों ने कहा कि राज्य अभी तो मौजूदा मांग को पूरा कर रहा है, लेकिन जलाशयों पर निर्भर इलाकों में सप्लाई और खपत के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है. यह स्थिति तब है जब कर्नाटक के कावेरी से जुड़े चार प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण काफी अच्छा है.

कृष्णराज सागर में 63.64 प्रतिशत, काबिनी में 92.31 प्रतिशत, हारंगी में 97.06 प्रतिशत और हेमावती में 86.56 प्रतिशत पानी था. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए तय कावेरी का हिस्सा नहीं छोड़ा है. Supreme Court के अंतिम आदेश के तहत, कर्नाटक को जून में 9.190 हजार मिलियन क्यूबिक फीट और जुलाई में 31.240 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी छोड़ना था.

हालांकि, तमिलनाडु को जून में सिर्फ 2.915 हजार मिलियन क्यूबिक फीट और जुलाई में 0.7138 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी ही मिला. भवानीसागर, अमरावती और वैगई समेत सिंचाई के अन्य बड़े जलाशयों में भी पानी का स्तर कम बना हुआ है.

अधिकारियों को अब इस बात की संभावना कम ही लगती है कि इस सीजन में मेट्टूर जलाशय अपनी पूरी क्षमता तक भर पाएगा. दक्षिण-पश्चिम मानसून से अपर्याप्त बारिश होने के कारण, तमिलनाडु को जलाशयों को भरने और खेती व पीने के पानी की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए इस साल के आखिर में उत्तर-पूर्व मानसून पर काफी हद तक निर्भर रहना होगा.

एसडी/एएस

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