महाराष्ट्र सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ पर वारिस पठान ने उठाए सवाल, कहा- वोट के लिए बांटे पैसे

Mumbai , 1 जून . एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने Maharashtra Government की ‘लाडकी बहिन योजना’ को लेकर सवाल उठाए. उनका कहा कि चुनाव से पहले जिन महिलाओं को इस योजना के तहत पैसे दिए गए थे उनमें से करीब 80 लाख महिलाओं को अचानक से कैसे अपात्र कह दिया गया? उनका आरोप है कि Government ने वोट लेने के लिए पैसे बांटे थे.

वारिस पठान ने कहा, “पहला सवाल यह है कि 80 लाख महिलाएं, जो अब तक पात्र थीं, अचानक डेढ़ साल के अंदर अपात्र कैसे हो गईं? चुनावों से पहले, हर कोई पात्र था. Maharashtra चुनावों के दौरान, Government ने ‘लाडकी बहिन योजना’ के तहत जनता का पैसा बांटा और महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए. यहां तक कि यह भी कहा गया था कि राज्य के खजाने में पैसे खत्म हो गए थे. Government ने चुनावों के दौरान सब कुछ बहुत खुले तौर पर दिखाया और इसका इस्तेमाल वोट पाने के लिए किया.”

वारिस पठान का सवाल है कि आखिर डेढ़ साल के अंदर ऐसा क्या बदल गया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की पात्रता खत्म कर दी गई. उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसमें Political फायदा लेने की मंशा दिखाई देती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पहले पात्र थी और उसे Government की ओर से लाभ मिला, तो फिर बाद में उसे अपात्र क्यों घोषित किया गया. इसके लिए जो भी अधिकारी या सिस्टम जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि यह पूरा मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक सवाल भी खड़ा करता है, क्योंकि इसमें आम जनता और खासकर महिलाओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है.

वारिस पठान ने यह भी कहा कि Government को यह साफ करना चाहिए कि किस आधार पर पात्रता तय की गई थी और बाद में किस नियम के तहत उसे बदला गया. उनके मुताबिक, जनता का पैसा टैक्सपेयर्स का पैसा होता है और उसका इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए नहीं होना चाहिए. उन्होंने मांग की कि पूरी सूची और प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

उनका कहना है कि यह मामला महिलाओं के साथ विश्वासघात जैसा है. पहले उन्हें योजना का लाभ देकर समर्थन लिया गया और बाद में उन्हें बाहर कर दिया गया. उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों ने पात्रता तय की या बाद में उसे हटाया, सभी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.

इसी दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले को लेकर कहा कि चाहे Political मतभेद हों या वैचारिक अंतर, किसी भी जनप्रतिनिधि पर इस तरह हमला करना पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और बहस हो सकती है, लेकिन हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. अगर किसी सांसद पर हमला होता है, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में इस तरह की घटनाओं को सही नहीं ठहराया जा सकता.

वारिस पठान ने कहा कि अगर इस तरह की घटनाएं बढ़ती हैं तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे की बात होगी. उन्होंने यह भी कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो, हिंसा को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.

उन्होंने यह भी जोड़ा कि Governmentें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और कानून व्यवस्था स्थायी होनी चाहिए. अगर किसी सिटिंग सांसद के साथ इस तरह की घटना होती है, तो यह बहुत गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

पीआईएम/डीकेपी

Leave a Comment