
Lucknow, 7 अगस्त . उत्तर प्रदेश के उपChief Minister ब्रजेश पाठक ने Samajwadi Party के ब्राह्मण सम्मेलन और जनेश्वर मिश्र जयंती कार्यक्रम को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि Samajwadi Party ब्राह्मण समाज का सम्मान नहीं, बल्कि उसे केवल वोट बैंक के रूप में देखती है.
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को ब्राह्मणों की याद केवल चुनाव के समय आती है, जबकि सत्ता मिलने पर पूरा लाभ सिर्फ एक परिवार तक सीमित रहता है.
उन्होंने Friday को social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सपा आज भी अंग्रेजों की “बांटो और राज करो” की नीति पर चल रही है. उन्होंने कहा कि पार्टी को ब्राह्मण वोट के लिए छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र की याद आती है, लेकिन राज करने के लिए केवल अपना परिवार दिखाई देता है.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ब्राह्मण वोट देकर सत्ता दिलाएं और उस सत्ता पर सपा अपने परिवार की ‘खड़ाऊं’ रखकर शासन करे, यही उसकी राजनीति बन गई है. जनेश्वर मिश्र की जयंती उनके समाजवादी विचारों और व्यक्तित्व को लोगों तक पहुंचाने का अवसर होनी चाहिए थी, लेकिन कार्यक्रम में उनके विचारों की चर्चा से ज्यादा Political आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमले किए गए. इससे न केवल जनेश्वर मिश्र की विरासत का अपमान हुआ, बल्कि पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा भी आहत हुई. कुछ टिकट के दावेदारों की महत्वाकांक्षा के कारण पूरे ब्राह्मण समाज को अपमानित करना उचित नहीं है. मुझे जितनी गालियां देनी हों दीजिए, लेकिन ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस मत पहुंचाइए.
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा Samajwadi Party, डॉ. राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के समाजवादी आदर्शों और Political संस्कारों से पूरी तरह भटक चुकी है. लोहिया संसद और विधानसभाओं को सार्थक बहस का मंच मानते थे और जनेश्वर मिश्र ने भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाया. दोनों नेताओं ने आंदोलनों का नेतृत्व किया, लेकिन सदन की कार्यवाही और लोकतांत्रिक संवाद को हमेशा प्राथमिकता दी.
उन्होंने कहा कि आज की सपा संसद और विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय हंगामा और अवरोध की राजनीति कर रही है. विपक्ष संविधान की प्रति हाथ में लेकर तस्वीरें तो खिंचवाता है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और संसदीय परंपराओं का सम्मान नहीं करता.
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर डॉ. लोहिया और जनेश्वर मिश्र के विचारों का अध्ययन करना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि नई सपा में समाजवाद, सामाजिक न्याय और समरसता का दर्शन नहीं होता.
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी संवाद की संस्कृति छोड़कर अराजक राजनीति की राह पर चल पड़ी है. सपा के लिए ब्राह्मण समाज केवल चुनावी वोट बैंक बनकर रह गया है. चुनाव तक उसका सम्मान दिखाया जाता है और चुनाव समाप्त होने के बाद वही समाज उपेक्षा का शिकार हो जाता है.
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विकेटी/एसके