मिथोस एआई से ‘अभूतपूर्व’ खतरे, बैंकों को सतर्क रहने की जरूरत: वित्त मंत्री सीतारमण

New Delhi, 24 अप्रैल . केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Friday को कहा कि भारतीय बैंक नई तकनीक से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हैं, हालांकि उन्होंने एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल से जुड़े खतरों को लेकर चिंता भी जताई.

मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि एंथ्रोपिक के ‘मिथोस एआई’ मॉडल से संभावित जोखिमों पर India नजर बनाए हुए है. यह मॉडल अपनी उन्नत क्षमताओं के कारण दुनिया भर में चर्चा में है.

वित्त मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) इस मामले में अन्य देशों की Governmentों और संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि इसके जोखिमों को समझा जा सके और बैंकिंग सिस्टम पर इसके असर का आकलन किया जा सके.

उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन तेजी से बदल रही एआई तकनीक के कारण ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.

सीतारमण ने संकेत दिया कि मौजूदा नियम और सुरक्षा व्यवस्था को अपडेट करना पड़ सकता है, ताकि नई और जटिल तकनीकी चुनौतियों का सामना किया जा सके.

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर बैंकों को आपस में मिलकर काम करने को कहा गया है.

उनका यह बयान एक दिन बाद आया है, जब उन्होंने मिथोस एआई से जुड़े ‘अभूतपूर्व’ खतरों की बात कही थी.

भारतीय बैंक संघ इस विषय पर बैंकों के बीच चर्चा का नेतृत्व करेगा, ताकि पूरे सेक्टर की तैयारी को और मजबूत किया जा सके.

इससे पहले इसी महीने, सीतारमण ने कहा था कि India की मजबूत आर्थिक स्थिति और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास नीतिगत फैसले लेने की ज्यादा गुंजाइश है.

6 अप्रैल को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि India के पास Governmentी खर्च (कैपेक्स) जारी रखने, आरबीआई के लिए ब्याज दरें घटाने और जरूरतमंद सेक्टर को मदद देने की पर्याप्त क्षमता है. यह पिछले एक दशक की वित्तीय अनुशासन का परिणाम है.

डीबीपी

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