महिला आरक्षण बिल की आड़ में सरकार का मकसद कुछ और था: विक्रमादित्य सिंह

शिमला, 18 अप्रैल . Himachal Pradesh Government में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने संसद में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर केंद्र Government की आलोचना की. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल की आड़ में Government का मकसद कुछ और था.

शिमला में से बातचीत में विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जो बिल सदन में लाने की कोशिश की गई, वह कोई कानून नहीं था, बल्कि सिर्फ एक बिल था. हालांकि इसे ‘महिला आरक्षण बिल’ नाम दिया गया था, लेकिन यह महिलाओं के आरक्षण का बिल कतई नहीं था. यह देश की डेमोग्राफी को बदलने का बिल था और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को अपनी Political सुविधा के अनुसार बदलने की असफल कोशिश थी.

मंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि 1971 की जनगणना को इंदिरा गांधी Government ने 1976 में 25 वर्षों के लिए फ्रीज कर दिया था. इसका कारण यह था कि कुछ राज्य जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा और परिवार नियोजन में बेहतर काम कर रहे थे, जबकि कुछ राज्यों में ऐसा नहीं हो रहा था, इसलिए यह तय किया गया कि जनसंख्या कम करने वाले राज्यों को इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी Government ने भी इसे अगले 25 वर्षों के लिए फ्रीज कर दिया, जो 2026 के अंत तक लागू था. कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर कह रही है कि अगर इसे 2023 में उसी रूप में लाया जाता, जिसमें महिला आरक्षण बिल पेश किया गया था, तो यह सर्वसम्मति से और बिना किसी विवाद के पास हो जाता.

विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि Government का मकसद कुछ और था. इसे महिलाओं की आड़ में लागू करने की कोशिश की गई, खासकर तब जब तीन बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे थे. यह महज एक Political चाल थी.

उन्होंने कहा कि अगर बिल को मौजूदा 545 सीटों के आधार पर लागू किया जाता तो यह कल ही पास हो जाता, लेकिन इसमें सीटों की संख्या 545 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था, जिसमें से लगभग 200 अतिरिक्त सीटें पुरुषों के लिए और सिर्फ 180 महिलाओं के लिए थीं. महिलाओं के आरक्षण में भी कटौती की जा रही थी.

मंत्री ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के आरक्षण की पूरी तरह समर्थक है, लेकिन इसे सही इरादे और सही तरीके से लाया जाना चाहिए था. Government की कुटिल सोच और छिपी हुई चाल कल Lok Sabha में पूरी तरह बेनकाब हो गई.

उन्होंने विपक्षी नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और शशि थरूर की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को बहुत अच्छे तरीके से उठाया.

विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि यह मोदी Government के कार्यकाल में पहली बार हुआ जब Government द्वारा लाया गया कोई बिल दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और पास नहीं हो सका.

डीकेएम/डीकेपी

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