
New Delhi, 17 दिसंबर . ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में यहूदियों पर Sunday 14 दिसंबर को हुए आतंकी हमले की अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी निंदा की. इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के तमाम देशों को कट्टर इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की.
बता दें, सिडनी के बोंडी बीच पर हनुक्का इवेंट में हुई मास शूटिंग में 15 लोग मारे गए. इसे लेकर ट्रंप ने व्हाइट हाउस में हनुक्का रिसेप्शन में कहा, “सभी देशों को कट्टर इस्लामिक आतंकवाद की बुरी ताकतों के खिलाफ एक साथ खड़ा होना चाहिए, और हम ऐसा कर रहे हैं.”
बता दें, बोंडी बीच हमले का आतंकी पहले Pakistanी बताया जा रहा था. खुलासा हुआ है कि इस हमले को अंजाम देने से पहले दोनों आतंकी पिछले महीने फिलीपींस गए थे. फिलीपींस के अधिकारियों का दावा है कि ये आतंकी भारतीय पासपोर्ट पर फिलीपींस आए थे. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया की जांच टीम फिलहाल इसकी जांच कर रही है कि दोनों फिलीपींस किस वजह से गए थे.
दूसरी ओर, India की तेलंगाना Police ने पुष्टि की है कि साजिद अकरम (50) असल में दक्षिणी शहर हैदराबाद का रहने वाला था और उसके पास भारतीय पासपोर्ट था. उन्होंने कहा कि उसने यूरोपियन मूल की एक महिला से शादी की और 1998 में नौकरी के मौकों की तलाश में ऑस्ट्रेलिया चला गया था. वह India में अपने परिवार से बहुत कम संपर्क में था.
तेलंगाना स्टेट Police चीफ, बी. शिवधर रेड्डी ने एक बयान में कहा, “परिवार वालों को उसकी कट्टर सोच या गतिविधियों के बारे में और न ही उन हालात के बारे में कोई जानकारी है जिनकी वजह से वह कट्टरपंथी बना.”
ऑस्ट्रेलियाई Police ने साजिद अकरम को मार गिराया था, जबकि उसका 24 साल का बेटा नवीद अकरम घायल हो गया और अभी भी हॉस्पिटल में है. साजिद के सभी कनेक्शन को ट्रैक कर रही इंटेलिजेंस एजेंसियों को पता चला कि वह हैदराबाद के टोली चौक में अल हसनाथ कॉलोनी का रहने वाला था.
फिलहाल इस बात का कोई संकेत नहीं है कि साजिद India में कट्टरपंथी बना था. अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह से विचारधारा से प्रेरित हमला था, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई. जांच में विसम हद्दाद नाम के एक कुख्यात मौलवी का पता चला है, जो इस्लामिक स्टेट से जुड़ा है. हद्दाद इस्लामिक स्टेट की कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करता है और कई चेतावनियों के बावजूद, ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां उसके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहीं.
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केके/एएस