ट्रंप ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त ही बना लें, फिर वे वही करेंगे, जो भारत में करते हैं : नासिर हुसैन

New Delhi, 18 अगस्त . India के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तारीफ किए जाने पर कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने कहा कि अच्छा होता कि ट्रंप उन्हें अमेरिका ले जाएं.

मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा कि भाजपा और उनकी Government मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव नहीं कर पा रही है. इसीलिए ट्रंप की जरूरत पड़ रही है कि वे ज्ञानेश कुमार का बचाव करें. ट्रंप उन्हें अमेरिका का मुख्य चुनाव आयुक्त ही बना लें, जो काम यहां कर रहे हैं, वहां भी करेंगे.

वहीं, Jharkhand के Chief Minister हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल और टीडीपीएल के तहत आयोजित होने वाली सभी परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा ने कहा कि राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी हमेशा छात्रों के साथ खड़ी रही है, चाहे वह जंतर-मंतर का आंदोलन हो या Jharkhand का आंदोलन. राहुल गांधी ने साफ कहा था कि छात्रों की मांगों को सुना जाना चाहिए और उनके हित में जो भी फैसले हों, उन्हें लागू किया जाना चाहिए. Jharkhand Government ने इसे मान लिया है. पूरा देश और Jharkhand के छात्र इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं.

ट्रंप के बयान पर सपरा ने कहा कि उन्हें India की जमीनी हकीकत की पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि हम एसआईआर के सिद्धांत के खिलाफ नहीं हैं. हमारा विरोध इस बात को लेकर है कि भाजपा Government के दौरान चुनाव आयोग एक कठपुतली की तरह काम कर रहा है. पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाए गए और इनमें से लाखों मामले न्यायाधिकरण में लंबित हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप को बिहार और एसआईआर से जुड़ी स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है.

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में एसआईटी रिपोर्ट पर चरण सिंह सपरा ने कहा कि उसे देखे बिना कोई ठोस टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

इसी बीच, असम के Chief Minister के प्रस्तावित फैसले पर कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इसके लिए नए नियम बनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसे मामलों से संबंधित कानून पहले से मौजूद हैं. असम के Chief Minister न तो संविधान को मानते हैं और न ही कानून को. वे अपनी मनमर्जी करते हैं. इसके लिए अलग से नियम बनाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से ही कानून मौजूद है.

डीकेएम/एबीएम

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