
New Delhi, 18 अगस्त . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनावी व्यवस्था की सराहना किए जाने पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा कि अमेरिका और India की वोटिंग प्रणाली में काफी फर्क है. उन्होंने कहा कि ट्रंप का मकसद अमेरिकी चुनाव प्रणाली को बेहतर बनाना है. अव्वाद के मुताबिक India में वोटर आईडी, आधार कार्ड वेरिफिकेशन और बर्थ सर्टिफिकेट जैसी व्यवस्थाएं हैं, जिसकी वजह से करोड़ों मतदाताओं वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को भी नियंत्रित किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि अब समय बदल गया है. पहले हम पश्चिमी देशों का अनुसरण करते थे, लेकिन अब अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश एशियाई सिस्टम अपना सकते हैं. साथ ही उन्होंने India में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर को ट्रंप का खास दोस्त बताते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी.
President डोनाल्ड ट्रंप की भारतीय चुनावी व्यवस्था को लेकर की गई सराहना पर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, “अमेरिकी Government ने एक Political मुद्दे को संबोधित किया है. अमेरिका और India के वोटिंग सिस्टम में काफी फर्क है. अमेरिका में डिसेंट्रलाइज्ड सिस्टम है. अगर ट्रंप इसका जिक्र कर रहे हैं तो इसका मकसद ये है कि वहां की चुनाव प्रणाली को और बेहतर बनाना.”
उन्होंने अमेरिकी President के बयान पर कहा कि अमेरिका में मिड टर्म चुनाव आ रहा है. President डोनाल्ड ट्रंप खुद मांग कर रहे हैं कि चुनाव के समय में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. India में वोटर आईडी, आधार कार्ड वेरिफिकेशन और बर्थ सर्टिफिकेशन भी हैं. इसके अलावा, वोटिंग बूथ पर भी जाना पड़ेगा. अमेरिका में चुनाव प्रणाली अलग है.
India के चुनाव प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है. पहले के समय में हम पश्चिमी दुनिया का अनुसरण करना चाहते थे. आज के समय में अमेरिका या अन्य पश्चिमी देश एशियाई सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं. India दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. हम फिर भी सबकुछ नियंत्रित कर सकते हैं, इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में India को बड़े दर्जे पर रखा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर President डोनाल्ड ट्रंप के बेहद खास दोस्त हैं. उनके India में काफी ताल्लुख हैं, इसलिए उन्हें यहां नियुक्त किया गया. India भी अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करना चाहता है. ट्रंप के कार्यकाल से पहले अमेरिका और India के बीच रणनीतिक साझेदारी बढ़ गया. अमेरिकी President के आने के बाद से चीजें सख्त हो गईं. India ने काफी मजबूत और सख्त तरीके से अपना पक्ष रखा. India ने बिल्कुल भी समझौता नहीं किया. अगर दोनों तरफ से समझौता हो सकता है, द्विपक्षीय समझौता मजबूत हो सकता है.
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केके/डीकेपी