दुर्लभ बीमारी से जूझ रही 22 माह की बच्ची के इलाज के लिए आगे आई त्रिपुरा सरकार, एम्स में इलाज के लिए उठाए कदम

New Delhi/अगरतला, 13 जुलाई . त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित 22 महीने की बच्ची के इलाज के लिए हरसंभव मदद दी जाए. इसके बाद New Delhi स्थित त्रिपुरा भवन ने बच्ची को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराने और इलाज की व्यवस्था के लिए तुरंत कदम उठाए.
Chief Minister कार्यालय (सीएमओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Monday को बताया कि मरीज मानस्री चौधरी, ध्रुव चौधरी की इकलौती बेटी हैं. उन्हें स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-1 नाम की गंभीर और जानलेवा बीमारी है. इस बीमारी में तुरंत और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज की जरूरत होती है.
Chief Minister के निर्देश के बाद New Delhi स्थित त्रिपुरा भवन के अधिकारियों ने तुरंत संसाधन जुटाए और परिवार की मदद तथा बच्ची के इलाज की व्यवस्था शुरू कर दी.
सीएमओ के अनुसार, त्रिपुरा भवन की टीम ने एम्स, New Delhi के साथ समन्वय किया है ताकि बच्ची को बिना किसी प्रशासनिक परेशानी के विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच और जरूरी इलाज मिल सके.
Chief Minister माणिक साहा ने एक बयान में कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि त्रिपुरा का कोई भी नागरिक गंभीर स्वास्थ्य संकट के समय खुद को असहाय महसूस न करे. राज्य Government नन्ही मानस्री के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और एम्स में इलाज के दौरान हर तरह की प्रशासनिक और जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी.”
सीएमओ के अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा भवन के रेजिडेंट कमिश्नर और अन्य अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. वे एम्स के डॉक्टरों और बच्ची के परिवार के लगातार संपर्क में हैं, ताकि New Delhi में उनके पूरे प्रवास के दौरान हरसंभव मदद मिल सके.
इस मामले को लेकर पूरे त्रिपुरा में लोगों का व्यापक समर्थन देखने को मिला है. अलग-अलग Political दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, गैर-Governmentी संगठनों (एनजीओ) और कई लोगों ने परिवार की आर्थिक मदद की है, क्योंकि इस दुर्लभ बीमारी का इलाज बहुत महंगा है.
नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी, पूर्व Chief Minister और Lok Sabha सांसद बिप्लब कुमार देब सहित कई अन्य Political नेताओं ने भी बच्ची और उसके परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं.
बिप्लब कुमार देब ने एम्स में बाल रोग विभाग के चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिवीजन की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी की देखरेख में बच्ची का इलाज कराने की पहल की है.
विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-1 इस दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का सबसे गंभीर रूप है. यह बीमारी शरीर की मांसपेशियों की ताकत और उनकी गतिविधि को प्रभावित करती है.
इस बीमारी का इलाज बहुत विशेष और बेहद महंगा होता है. यही वजह है कि पूरे त्रिपुरा के लोग बच्ची को जीवनरक्षक इलाज दिलाने के लिए आगे आकर उसका समर्थन कर रहे हैं.
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एएमटी/वीसी


