
अगरतला, 1 जुलाई . त्रिपुरा विधानसभा के 63वें स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता और सीपीआई(एम) विधायक जितेंद्र चौधरी ने विधानसभा के ऐतिहासिक महत्व और लोकतांत्रिक विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यह दिन सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और खुशी का अवसर है.
जितेंद्र चौधरी ने अपने संबोधन में न केवल विधानसभा की स्थापना से जुड़े लोगों को याद किया, बल्कि त्रिपुरा टेरिटोरियल काउंसिल के समय जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को भी श्रद्धांजलि दी. उन्होंने उन सभी दिवंगत जनप्रतिनिधियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में योगदान दिया.
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा विधानसभा केवल एक भवन नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत लोगों के त्याग, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है, जिन्होंने लोकतंत्र की स्थापना और उसे मजबूत करने के लिए कार्य किया. कई लोगों ने इस संस्थान के निर्माण में अपना पूरा जीवन समर्पित किया है.
विपक्ष के नेता ने कहा कि इस विधानसभा का इतिहास केवल इसके भवन के निर्माण से नहीं जुड़ा है, बल्कि इसकी जड़ें त्रिपुरा की उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हैं जब यह एक रियासत हुआ करती थी. उस समय राजशाही शासन के स्थान पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन हुए थे.
उन्होंने उन सभी लोगों को नमन किया, जिन्होंने लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष किया और जनता के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया. उन्होंने कहा कि आज हर पांच साल में चुनाव के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है, जिससे लोकतांत्रिक परंपराएं और मजबूत हुई हैं.
जितेंद्र चौधरी ने यह भी कहा कि चाहे वे Political दलों से जुड़े हों या निर्दलीय, सभी जनप्रतिनिधियों ने मिलकर विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाया है.
त्रिपुरा के Governor ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि त्रिपुरा विधानसभा के 63वें स्थापना दिवस के इस खास मौके पर आपके सामने खड़ा होना मेरे लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है. मैं इस सदन के हर सदस्य, हर अधिकारी और कर्मचारी को, और आप सभी को – यानी त्रिपुरा के उन 40 लाख नागरिकों को, जो हमारे लोकतंत्र के असली हिस्सेदार हैं – दिल से बधाई देता हूं.
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एएमटी/डीकेपी