‘आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की किरण जिंदा है’, कुलदीप सेंगर के खिलाफ फैसले पर बोलीं अलका लांबा

New Delhi, 29 दिसंबर . Supreme Court ने Monday को उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को रद्द करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई. इस पर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की एक किरण जिंदा है.

अलका लांबा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं देश से अपील करती हूं कि इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाएं. बेटियों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. अंकिता भंडारी के माता-पिता भी Supreme Court के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. मैंने हाथरस पीड़िता के भाई से बात की है और वह भी इंतजार कर रहा है. आज कई बेटियों के लिए उम्मीद की एक किरण जिंदा है.”

योगिता भयाना ने कहा कि Supreme Court ने पहले मौखिक रूप से संकेत दिया था. बाद में अदालत ने आधिकारिक तौर पर कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगाने का आदेश दिया है. महिला एक्टिविस्ट ने बताया कि Supreme Court ने पीड़िता से भी दखल देने और अपनी याचिका दायर करने के लिए कहा है.

इस मामले पर कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने कहा, “पूरा देश इस मामले को देख रहा है. हमें उम्मीद थी कि Supreme Court कोई स्टैंड लेगा और यह आदेश हमें उम्मीद देता है. जो लड़की दर्द में भटक रही है, उसके जीवन में सुरक्षा और न्याय की जगह होनी चाहिए. हम प्रार्थना करते हैं कि उसे न्याय मिले और भविष्य में देश की हर लड़की को न्याय मिले.”

बता दें कि Supreme Court ने Monday को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया गया था.

पीड़िता के वकील ने मीडिया में बयान दिया कि इसे जीत नहीं कहा जा सकता, लेकिन हमें थोड़ी सांस लेने का समय मिला है. उन्होंने कहा, “सीबीआई ने बहुत सीमित मुद्दे पर स्टैंड लिया और हमारे सबसे मजबूत तर्कों को सामने नहीं रखा. सीबीआई ने हमसे बिल्कुल भी सलाह नहीं ली. पीड़िता के पक्ष में इतने सबूत हैं कि कोई भी कोर्ट उसके समर्थन में फैसला देगा. कोर्ट ने मुख्य बातों पर हमारी बात नहीं सुनी. सीबीआई ने केस के सिर्फ ऊपरी हिस्से पर बात की है. सीबीआई ने हमें इस केस में पार्टी भी नहीं बनाया.”

उन्होंने दोहराया कि हम इस फैसले को पीड़ित की जीत नहीं मान सकते हैं.

डीसीएच/

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