भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लिए 10 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी का लक्ष्य रखना जरूरी : रिपोर्ट

New Delhi/यरुशलम, 16 अगस्त . अगर देश को ‘विकसित India 2047’ के विजन को सही मायने में साकार करना है, तो देश को अपनी अर्थव्यवस्था के आकार में काफी विस्तार करना होगा और अर्थव्यवस्था को कम से कम 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना जरूरी होगा. यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई.

पूर्व राजनयिक मोहन कुमार ने ‘द जेरूसलम पोस्ट’ में प्रकाशित एक आर्टिकल में कहा कि India के जीडीपी के लिहाज से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर गर्व किया जा सकता है, लेकिन देश की विशाल आबादी को देखते हुए वर्तमान आर्थिक आकार अभी भी पर्याप्त नहीं है.

उन्होंने लिखा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि India दुनिया में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लिहाज से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने पर गर्व कर सकता है, लेकिन करीब 1.5 अरब की आबादी वाले देश के लिए 4.5 ट्रिलियन डॉलर की मौजूदा जीडीपी अपेक्षाकृत कम है.”

आर्टिकल के अनुसार, India वैश्विक विदेशी व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर, अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करके और गहरे एवं संरचनात्मक आर्थिक सुधार लागू करके 10 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है.

हालांकि, इसमें जोर दिया गया कि केवल आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाना विकसित India के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचना भी जरूरी होगा, खासकर आर्थिक पिरामिड के सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों तक.

मोहन कुमार ने लिखा, “जीडीपी की वृद्धि दर तेज होनी चाहिए, इसमें कोई सवाल नहीं है, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है. विकास समावेशी होना चाहिए और इसका लाभ आर्थिक पिरामिड के निचले पायदान पर मौजूद वंचित लोगों तक पहुंचना चाहिए.”

उन्होंने ऐसे आर्थिक माहौल की जरूरत पर भी जोर दिया, जिसमें India की युवा आबादी को केवल पारंपरिक रोजगार के अवसरों पर निर्भर रहने के बजाय उद्यमी और रोजगार पैदा करने वाला बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाए.

Prime Minister Narendra Modi कई मौकों पर युवा उद्यमिता को विकसित India का प्रमुख स्तंभ बता चुके हैं. वहीं, मोदी Government के तहत देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेज वृद्धि हुई है. देश में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं और युवा उद्यमियों के सपनों को समर्थन देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का इनोवेशन फंड भी है.

रिपोर्ट में तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्नातकों को नई स्किल और री-स्किलिंग प्रदान करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, खासकर तब जब देश की शिक्षा प्रणाली अभी भी पारंपरिक और रटने पर आधारित शिक्षा पर काफी निर्भर है.

इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में Prime Minister मोदी ने घोषणा की थी कि Government अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में काम करेगी. इससे युवाओं को एआई के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक क्षमताएं हासिल करने में मदद मिलेगी. India में हाल ही में आयोजित एआई समिट का उल्लेख करते हुए Prime Minister मोदी ने देश के युवाओं के बीच एआई कौशल का विस्तार करने वाली एक बड़ी पहल की घोषणा की.

रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया है, जिस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है. केंद्र Government की आयुष्मान India योजना जैसी पहलों को स्वीकार करते हुए कुमार ने कहा कि India को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव जारी रखने की जरूरत होगी.

आर्टिकल के अनुसार, यदि India को समावेशी विकास हासिल करना है और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है, तो देश की अधिकांश आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाना होगा.

मोहन कुमार ने आगे कहा कि 2047 तक विकसित India का लक्ष्य हासिल करने के लिए Government को स्पष्ट तात्कालिकता और राष्ट्रीय उद्देश्य की भावना के साथ काम करना होगा. इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयास आवश्यक होंगे.

उन्होंने जोर देते हुए कहा, “India 2047 तक विकसित India बनने की स्थिति में है, लेकिन देश को मिशन मोड में काम करने की जरूरत है. यह सुनिश्चित करने के लिए पूरे Governmentी तंत्र को एकजुट होकर काम करना होगा कि इस राष्ट्रीय प्रयास में कोई कसर न छोड़ी जाए.”

एबीएस

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