भारत-अमेरिका संबंधों में साझा मूल्य होने चाहिए: कांग्रेसमैन रो खन्ना

वाशिंगटन, 30 जून . अमेरिका-India रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में डेमोक्रेटिक कांग्रेसमैन रो खन्ना ने President डोनाल्ड ट्रंप की विदेश और इमिग्रेशन नीति की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी आखिर में लेन-देन के फायदे के बजाय साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए.

खन्ना कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली का प्रतिनिधित्व करते हैं और तकनीक और विदेश नीति पर डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख आवाजों में से एक माने जाते हैं. उन्होंने अपने भाषण का ज्यादातर हिस्सा ग्लोबल अलायंस, टैरिफ और इमिग्रेशन को लेकर ट्रंप के अप्रोच पर हमला करने में लगाया और फिर India के साथ अमेरिका के संबंध के लिए अपना विजन बताया.

उन्होंने ट्रंप Government को एकतरफा एक्शन और व्यापार नीति के जरिए अमेरिका की वैश्विक पहचान को कमजोर करने का आरोप लगाया. खन्ना ने कहा, “हमें दुनिया भर में अपने संबंध फिर से बनाने होंगे. अमेरिकी नेताओं की अगली पीढ़ी को विदेश में देश की विश्वसनीयता वापस लानी होगी.”

लेकिन Political आलोचना के बीच, खन्ना ने अपनी स्पीच का दूसरा हिस्सा भारत-अमेरिका संबंध के गहरे मकसद पर फोकस किया और कहा कि इसे रक्षा, व्यापार और निवेश से आगे बढ़कर दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक आदर्शों को दिखाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “एक भारतीय अमेरिकी के तौर पर मेरी उम्मीद है कि जब हम अमेरिका-India संबंध के बारे में बात करते हैं, तो हम रक्षा, आर्थिक और निवेश संबंधों से आगे बढ़कर बात करें. आइए बात करते हैं कि हमारे सबसे ऊंचे मूल्यों, यहां और दुनिया भर में मानवीय स्वतंत्रता को फलते-फूलते देखने के मूल्यों के हिसाब से संबंध को कैसा होना चाहिए.”

अमेरिकी कांग्रेसी ने कहा, “हम चाहते हैं कि यहां और दुनिया भर में आत्मनिर्णय (सेल्फ-डिटरमिनेशन) की भावना मजबूत हो, शांति स्थापित हो और मानव सभ्यता के सामने मौजूद चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम किया जाए. यह किसी अंधे गठबंधन का समर्थन करने की बात नहीं है, बल्कि ऐसे साझेदारों के साथ जुड़ने की बात है जो सभ्यता और मानवता के साझा मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हों.”

खन्ना ने अपनी बातों को लोकतांत्रिक और डीकोलोनाइजेशन के चैंपियन के तौर पर अमेरिका की ऐतिहासिक भूमिका के इर्द-गिर्द रखा और President फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट की विदेश नीति की तुलना ट्रंप के ज्यादा ट्रांजैक्शनल अप्रोच से की.

उन्होंने कहा, “अमेरिका डीकोलोनाइजेशन के लिए है. अमेरिका आजादी के लिए है. अमेरिका एक अच्छा पड़ोसी बनने के लिए है. अमेरिका सिर्फ यूनाइटेड स्टेट्स में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मानवाधिकार और आजादी के सिद्धांत के लिए है.”

उन्होंने कहा कि उन आइडियल्स ने इमिग्रेंट्स की कई पीढ़ियों को, जिसमें उनका अपना परिवार भी शामिल है, अमेरिका को अपना घर बनाने के लिए प्रेरित किया है. इसी ने मेरे माता-पिता को अमेरिका आने के लिए प्रेरित किया. इसी ने यहां किसी को अमेरिका आने के लिए प्रेरित किया.”

खन्ना ने Government की इमिग्रेशन पॉलिसी की भी आलोचना की और कहा कि इन नीतियों ने ऐसे समय में दुनिया के बेस्ट टैलेंट को आकर्षित करने की अमेरिका की काबिलियत को कमजोर किया है, जब तकनीक के क्षेत्र में बहुत ज्यादा प्रतियोगिता है. वह एआई में लीड करने की बात करते हैं. टॉप एआई रिसर्चर में से 38 फीसदी चीनी मूल के हैं. 72 फीसदी के पास विदेशी डिग्री है. यह एक ऐसे President हैं जो यह नहीं समझते कि हमें प्रतिभाशाली लोगों को नियुक्त करने की जरूरत है, टैलेंट को दूर करने की नहीं.”

अमेरिका के चुनावों को देखते हुए, खन्ना ने डेमोक्रेटिक पार्टी के फिर से उभरने का अनुमान लगाया और दावा किया, “डेमोक्रेट्स 2026 में पक्के तौर पर जीतेंगे और हम 2028 में जीतेंगे. हम इस देश को फिर से उभरता हुआ देखेंगे.”

उन्होंने तर्क दिया कि Political और आर्थिक उथल-पुथल के दौर के बाद अमेरिका ने बार-बार खुद को फिर से खड़ा करने की क्षमता दिखाई है. उन्होंने कहा, “अमेरिका में खुद को सुधारने की जबरदस्त क्षमता है. हमारी नियति दुनिया का पहला एकजुट, बहु-नस्लीय लोकतंत्र बनना है.”

खुद को हिंदू धर्म का पालन करने वाला भारतीय-अमेरिकी बताते हुए खन्ना ने कहा कि उन्हें अपने दादा से प्रेरणा मिली, जिन्होंने India के स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया था. साथ ही, उन्हें उन अमेरिकी पीढ़ियों से भी प्रेरणा मिली, जिन्होंने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया.

उन्होंने कहा, “एक भारतीय-अमेरिकी के तौर पर मेरी उम्मीद है कि हम अमेरिका-India संबंधों को आजादी और मानवीय गरिमा को आगे बढ़ाने के नजरिए से देखें.”

खन्ना 2017 से कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अमेरिकी कांग्रेस के सबसे प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सदस्यों में गिने जाते हैं.

उनके सिलिकॉन वैली स्थित निर्वाचन क्षेत्र में दुनिया की कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां हैं. वह नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में India और अमेरिका के बीच करीबी सहयोग की लगातार वकालत करते रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने ट्रंप प्रशासन की कई नीतियों की खुलकर आलोचना भी की है.

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब India और अमेरिका रक्षा, व्यापार, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा कर रहे हैं.

हालांकि खन्ना का भाषण पूरी तरह Political था, लेकिन उसका मुख्य संदेश यह था कि India और अमेरिका के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की मजबूती अंततः इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों लोकतंत्र स्वतंत्रता, बहुलवाद और आत्मनिर्णय के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध बने रहें.

केके/एएस

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