बढ़ती उम्र में गिरने का खतरा सबसे ज्यादा, जानें इस जोखिम को कैसे कम करता है योगासन

New Delhi, 11 जून . उम्र बढ़ने के साथ-साथ गिरने का खतरा सबसे ज्यादा हो जाता है. छोटी-सी असावधानी या कमजोर संतुलन बुजुर्गों को गंभीर चोट पहुंचा सकता है. ऐसी स्थिति में योगासन एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय साबित हो रहा है.

India Government के आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास बुजुर्गों में गिरने के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चेतावनी देता है कि गिरना बुजुर्गों में चोट और विकलांगता का प्रमुख कारण है. 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में संतुलन बिगड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी और जोड़ों की अकड़न आम समस्या बन जाती है. इन सबके कारण रोजमर्रा के कामों में भी दिक्कत होती है और गिरने की आशंका बढ़ जाती है.

रिसर्च बताती है कि योग इन समस्याओं का बेहतरीन समाधान है. नियमित योग से शरीर का संतुलन, तालमेल और शारीरिक गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार आता है. एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर किए गए अध्ययनों का विश्लेषण किया गया. नतीजे चौंकाने वाले रहे. योग करने वाले बुजुर्गों में बैलेंस और मोबिलिटी दोनों ही बेहतर पाए गए, जिससे गिरने का खतरा साफ तौर पर कम हुआ.

आसान योगासन जैसे वृक्षासन, ताड़ासन, भुजंगासन और सेतु बंधासन पैरों, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं. ये आसन संतुलन की क्षमता बढ़ाते हैं और शरीर को स्थिर रखने में मदद करते हैं. साथ ही, योग से मन शांत रहता है, डर और घबराहट कम होती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है.

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, योग सिर्फ शारीरिक फिटनेस ही नहीं बढ़ाता, बल्कि बुजुर्गों को स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने में भी सहायक है. विशेषज्ञों का कहना है कि रोज सिर्फ 20-30 मिनट योग करने से भी फायदा मिल सकता है. शुरुआत में किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो.

एमटी/एएस

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