
New Delhi, 4 अगस्त . कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने उपचुनाव के नतीजों, Jharkhand लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) विवाद और अहम Political मुद्दों पर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि दतिया और बांकीपुर उपचुनाव में जनता ने भाजपा Government के भ्रम को तोड़ दिया.
बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने से बातचीत में कहा, “भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के गढ़ में भाजपा का हारना यह साबित करता है कि Prime Minister Narendra Modi की कार्यशैली को लेकर जो भ्रम फैला रखा है, वह टूट चुका है. हर जगह लोगों में आक्रोश और निराशा है. इसी का परिणाम है बांकीपुर और दतिया में भाजपा को हार मिली है.”
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “अदालत अपने सामने मौजूद सबूतों के आधार पर फैसला सुनाती है. हालांकि, कई बार सत्ता में बैठे लोग अपने फायदे के लिए सबूतों में हेर-फेर करते हैं. हाईकोर्ट और Supreme Court जैसे उच्च न्यायिक मंच भी मौजूद हैं. आखिरकार, मुझे पूरा भरोसा है कि सच की ही जीत होगी.”
Jharkhand लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) विवाद पर भाजपा द्वारा सवाल उठाए जाने पर कांग्रेस सांसद ने कहा, “भाजपा को असलियत पता नहीं है और वे बिना किसी आधार के आरोप लगाते रहते हैं. मैंने निशिकांत दुबे को कांग्रेस पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए देखा. सबसे जरूरी बात यह है कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ था. ओएमआर शीट में कुछ गलतियां थीं, जिसके बाद Chief Minister हेमंत सोरेन ने तुरंत कार्रवाई की. जैसे ही यह मामला सामने आया, चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया और 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही सीआईडी जांच कर रही है. हालांकि मेरा मानना है कि इस मामले में Government को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. Chief Minister को युवाओं से संवाद करना चाहिए. प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए.”
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा 6 अगस्त को ‘जेन जी’ से बात करने को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “यह अच्छी बात है. बातचीत जरूरी है और यह हमेशा होनी चाहिए. लोकतंत्र में बातचीत का बहुत महत्व है. हालांकि, ऐसी बातचीत खुली होनी चाहिए और इसमें दूसरों पर अपने विचार थोपने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि नए विचारों को अपनाना चाहिए लेकिन मोहन भागवत ने अतीत में ‘जेन जी’ के बारे में, खासकर संस्कृति के नाम पर, जिस तरह की बातें कही हैं, उन्हें देखते हुए मुझे नहीं लगता कि यह बातचीत बहुत फायदेमंद साबित होगी.”
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