
New Delhi, 17 जुलाई . अपनी कप्तानी में भारतीय महिला अंडर-19 टीम को टी20 विश्व कप 2025 का खिताब जीताने वाली निकी प्रसाद ने कहा है कि इंडिया ए महिला टीम के सदस्य के तौर पर इंग्लैंड टूर से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है. इंडिया ए इंग्लैंड ए खिलाफ वनडे सीरीज 2-1 से जीती थी.
निकी प्रसाद ने इंग्लैंड दौरे पर मिले अनुभव पर से खास बातचीत की है और कई अहम सवालों के जवाब दिए हैं.
सवाल: इंडिया ए महिला टीम का हिस्सा बनना आपके लिए कैसा रहा, जो 50 ओवर के फॉर्मेट में शानदार खेल रही है?
जवाब: मैं पहली बार इंडिया ए का हिस्सा थी. मैं पहली बार इंग्लैंड गई थी. टीम का माहौल बहुत अच्छा था. इंग्लैंड में ऐसे हालात में खेलना एक अलग एहसास था. वहां जाकर मैं खुद को एक्सप्रेस करने के लिए उत्साहित थी. मैं वहां गई, कुछ गेम खेले, और कुछ स्कोर बनाए. मुझे लगता है कि यह आत्मविश्वास बढ़ाने वाला था. जीतने वाली टीम का हिस्सा होना अच्छा अनुभव देता है.
सवाल: आप प्रेमा रावत को टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड में चुने जाने के बाद उनकी जगह लेने के लिए थोड़ा जल्दी इंग्लैंड आ गए थे. जब आपको अचानक कॉल-अप मिला तो आपके मन में क्या चल रहा था?
जवाब: मुझे कुछ खास नहीं लगता क्योंकि जब मैं अभ्यास करती हूं, तो यह एक सिनेरियो में टी20 और 50 ओवर दोनों को एक साथ करने के बारे में ज्यादा होता है. इसलिए इसमें ज्यादा फर्क नहीं था. मैं और भी ज्यादा उत्साहित थी कि मुझे टी20 भी खेलने को मिलेगा. इसलिए मैं जल्दी आ गई. बदकिस्मती से टी20 का नतीजा हमारे पक्ष में नहीं गया.
सवाल: क्या आप यूके टूर के अपने कुछ अनुभव साझा कर सकती हैं? वहां खेलने का सबसे बड़ा अनुभव क्या रहा?
जवाब: वहां की परिस्थितियां India की परिस्थितियों से काफी अलग थीं. विकेट और विरोधी टीम बहुत अलग थी. इंग्लैंड में, सभी खिलाड़ी काफी लंबे थे, खासकर तेज गेंदबाज. वे बहुत अच्छे बाउंसर फेंक रहे थे, जो कमर से ऊपर आ रहे थे. मुझे लगता है कि यह एक सीख है जो मैंने वहां से ली है कि मुझे बैकफुट प्ले में भी बहुत सुधार करने की जरूरत है. मुझे पुल और कट शॉट खेलना पसंद है. मैं वहां शॉर्ट बॉल के साथ जल्दी बहुत जल्द संतुलन बनाने में कामयाब रही.
सवाल: जब आप इंग्लैंड में नए कंडीशन में खेल रहे थे, तो इंडिया ए के कोचों के साथ आपकी क्या बातचीत हुई?
जवाब: मुझे लगता है कि बहुत सारे कोच पहले ही इंग्लैंड जा चुके हैं. उन्हें पता है कि वहां के हालात क्या थे. कोचों से मुझे अच्छा दिशा-निर्देश मिला. बैटिंग कोच के साथ मेरी बातचीत में यही था कि किसी भी चीज को ओवरहिट न करें और यह अंदाजा लगाएं कि गेंद कितनी ऊंचाई तक आ सकती है और उसी हिसाब से खेलें. आपको पुल और कट शॉट खेलने के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि वे हमेशा हार्ड लेंथ पर हिट करते रहते हैं. इसलिए आपको हमेशा उन गेंदों के लिए तैयार रहना होगा.
इंग्लैंड के बल्लेबाज बहुत ज्यादा स्क्वेयर खेलते हैं. आप गेंदबाजी के दौरान गेंद को कैसे पिच करते हैं? मैंने वहां गेंद को ऊपर पिच करते रहना और उन्हें ड्राइव करवाते रहना ताकि वे स्वीप और रिवर्स स्वीप न खेलें. यह एक सीख थी, जो मुझे मिली.
सवाल: इंडिया ए के लिए खेलने के अनुभव ने आपको सीनियर टीम में जाने के लिए जरूरी स्तर को समझने में कैसे मदद की? इस दौरे में आपके खेल के किस क्षेत्र में बड़ा सुधार हुआ?
जवाब: इंग्लैंड में रहना मेरे लिए बहुत अच्छा अनुभव था. यह समझने के लिए कि जब आप किसी दूसरे देश में जाकर उनके खिलाफ खेलते हैं तो स्तर कैसे हो सकते हैं. मैंने आपको पहले बताया, गेंद को जल्दी से पीछे जाकर पुल करने या बस बाहर निकलकर कवर्स के ऊपर से हिट करने के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला. मुझे लगता है कि ये वो क्षेत्र हैं जो मुझे ऊच्चतम स्तर पर बहुत सारे रन दिलाएंगे.
गेंदबाजी के मामले में भी, बल्लेबाजी के हिसाब से जल्दी से ढलने के लिए, क्योंकि कुछ बल्लेबाज बहुत ज्यादा स्क्वेयर खेल रहे होंगे, इसलिए आपको यह जानना होगा कि इसे कैसे पिच करना है, और आपको यह भी जानना होगा कि हार्ड लेंथ और बहुत सारे वेरिएशन के साथ कैसे हिट करना है. आउटफील्ड और बाकी सब चीजों के साथ भी, आमतौर पर बहुत बड़ी बाउंड्री लाइन होती हैं. आपको गेंद का पीछा करने या जल्दी से तीन रन बनाने के लिए सच में काफी फिट होना होगा. मुझे लगता है कि इस तरह के गेम और मौके दूसरे खिलाड़ियों और मुझे भी सीनियर टीम की तैयारी के लिए बहुत अच्छा मौका देते हैं.
सवाल: अनुभव की बात करें तो, महिला प्रीमियर लीग में Gujarat जायंट्स के खिलाफ आपकी पारी, जहां आपने दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) को लगभग लाइन पार करा दी थी – इसके बारे में थोड़ा बताएं. क्या आप फील्ड प्लेसमेंट या बाउंड्री डायमेंशन के आधार पर पहले से सोच रही थी या अपनी समझ से खेल रही थी?
जवाब: उस समय मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था कि मुझे उस लाइन से बाहर निकलना है और गेम खत्म करना है और मैच डीसी के लिए जीतना है. जब मैं खेल रही थी, स्नेह (राणा) राणा अंदर आईं. उन्होंने ने भी कहा कि हम यह कर लेंगे और बस पूरी जान लगा देंगे. हमने पूरी कोशिश की. बदकिस्मती से हमने जीत नहीं सके, लेकिन उस मैच ने हमें बहुत कुछ सीखाया. मैं ऐसे हालातों के लिए तैयारी कर रही हूं, ताकि भविष्य में किसी अन्य मौके पर बेहतर कर सकूं.
सवाल: इंग्लैंड में मैदान पर कदम रखने से पहले आप आराम करने और अपने दिमाग को फ्रेश करने के लिए क्या करती थीं?
जवाब: मुझे प्रकृति बहुत पसंद है. गेम से वापस आकर बस आराम करना और बाहर टहलने जाना बहुत अच्छा लगा. वहां बहुत ज्यादा ट्रैफिक या कारें नहीं थीं. बिल्कुल गांव जैसा था. मैं बस वॉक पर जा रही थी और कॉफी पी रही थी.
सवाल: आप पिछले दो 50-ओवर के गेम के लिए टॉन्टन में थीं. टॉन्टन एक बहुत ही खास जगह है. आपके आदर्श, राहुल द्रविड़, ने 1999 के वनडे विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ यहां एक जबरदस्त पारी खेली थी. जब आप टॉन्टन के मैदान पर आईं, तो क्या आपके मन में यह बात आई?
जवाब: मुझे लगता है कि कोई मुझे इसके बारे में बता रहा था. उस समय, मुझे बस यह एहसास हुआ कि मेरे आदर्श पहले ही यहां आ चुके हैं और उन्होंने अपनी सबसे अच्छी पारियों में से एक खेली है. मैं भी ऐसा करना चाहती हूं या उसके करीब कुछ हासिल करना चाहती हूं और भारतीय टीम के लिए मैच जीतना चाहती हूं. हमने वहां वनडे सीरीज जीती. यह एक अच्छी याद है.
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पीएके