तमिलनाडु: केएन नेहरू ने कथित रिश्वतखोरी मामले में आदेश की समीक्षा के लिए हाईकोर्ट में दायर की याचिका

चेन्नई, 28 अप्रैल . तमिलनाडु के नगर प्रशासन, शहरी और जल आपूर्ति मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाई कोर्ट के पिछले आदेश की समीक्षा की मांग की है, जिसमें नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नियुक्तियों में कथित रिश्वतखोरी के मामले में First Information Report दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.

20 फरवरी को दिए गए उस आदेश में कोर्ट ने Enforcement Directorate द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के आधार पर भ्रष्टाचार के प्रथम दृष्टया सबूतों को देखते हुए निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था.

मंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि यह आदेश बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया है.

उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि समीक्षा याचिका के निपटारे तक आदेश पर रोक लगाई जाए, क्योंकि मंत्री को ‘बिना सुने कई आरोपों का सामना करना पड़ा है.’

रोहतगी ने यह भी तर्क दिया कि 4 फरवरी को कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी किया गया नोटिस अवैध था और वह बेंच द्वारा जारी नहीं किया गया था. क्योंकि मामला पहले ही आदेश के लिए सुरक्षित रखा जा चुका था.

उन्होंने कहा कि यह नोटिस कार्यवाही समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ, जिससे याचिकाकर्ता को निष्पक्ष सुनवाई से वंचित होना पड़ा.

पीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि केएन नेहरू को औपचारिक रूप से नोटिस दिया गया था या नहीं.

मामले की विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने इसे गर्मी की छुट्टियों के बाद जून के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया.

हालांकि, रोहतगी ने First Information Report दर्ज करने से रोक लगाने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि 20 फरवरी के आदेश में स्पष्ट रूप से नेहरू के खिलाफ First Information Report दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया गया था.

इस बीच, राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुरई द्वारा दायर अवमानना याचिका का भी जिक्र अदालत में किया गया, जिसमें उन्होंने पहले के आदेश का पालन न होने का आरोप लगाया था. उनके वकील ने बताया कि छुट्टियों के दौरान इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

हाई कोर्ट ने पहले राज्य Government की आलोचना करते हुए कहा था कि ईडी की रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी गंभीर मामलों में उचित नहीं है. राज्य Government ने अदालत को बताया था कि First Information Report दर्ज करने में देरी समीक्षा याचिका दायर करने के कारण हुई, जो अब विचाराधीन है.

एएमटी/डीकेपी

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