
चेन्नई, 22 अगस्त . कमाई से खर्च ज्यादा होने पर तमिलनाडु Government की ओर से जुलाई में बॉन्ड जारी करके 12,044 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया. फिस्कल डेटा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में खर्च, कमाई से ज्यादा रहा. टीवीके Government की ओर से अपना पहला बजट पेश करने के 100 दिनों से ज्यादा समय बाद ये आंकड़े सामने आए हैं.
लोगों को उम्मीद थी कि Government बदलने से कामकाज के तरीके में बदलाव आएगा, लेकिन कर्ज के ताजा आंकड़ों ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर सबका ध्यान खींचा है. अप्रैल से जुलाई के बीच, तमिलनाडु को कुल 89,718 करोड़ रुपए की कमाई हुई. इसमें टैक्स से होने वाली कमाई का हिस्सा सबसे ज्यादा 82,566 करोड़ रुपए था, जबकि बिना टैक्स वाली कमाई 4,070 करोड़ रुपए थी. केंद्र Government से मिले ग्रांट से 3,082 करोड़ रुपए और आए.
राज्य कई स्रोतों से कमाई करता है, जिनमें राज्य का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST), स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस, जमीन से जुड़ी कमाई, बिक्री और कमर्शियल टैक्स, राज्य की एक्साइज ड्यूटी, केंद्रीय टैक्स में अपना हिस्सा, अन्य ड्यूटी और बिना टैक्स वाली कमाई शामिल हैं. इसे केंद्र Government से ग्रांट भी मिलता है. हालांकि, अप्रैल-जुलाई की अवधि में कुल खर्च 1.23 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जिससे 25,267 करोड़ रुपए का रेवेन्यू घाटा हुआ.
मौजूदा लोन पर ब्याज का भुगतान खर्च के सबसे बड़े हिस्सों में से एक था, जो 21,176 करोड़ रुपए रहा. पेंशन भुगतान पर 17,237 करोड़ रुपए खर्च हुए. आमदनी से ज्यादा खर्च होने के कारण, Government कल्याणकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं और दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार से उधार लेने पर निर्भर रही है. आम तौर पर Governmentी सिक्योरिटीज जारी करके और बैंकों व अन्य अधिकृत माध्यमों से उधार लेकर फंड जुटाया जाता है.
फाइनेंशियल ईयर के पहले चार महीनों में तमिलनाडु का कुल उधार 32,925 करोड़ रुपए रहा. जून तक कुल आंकड़ा 20,881 करोड़ रुपए था, जिससे पता चलता है कि राज्य ने अकेले जुलाई में अपने कर्ज में 12,044 करोड़ रुपए जोड़े. पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि की तुलना में भी उधार ज्यादा था. अप्रैल और जुलाई 2025 के बीच, Government ने कुल 85,876 करोड़ रुपए का रेवेन्यू कमाया और 1.09 लाख करोड़ रुपए का खर्च किया.
उन चार महीनों के दौरान उधार 30,956 करोड़ रुपए था. ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि जहां Government के रेवेन्यू में साल-दर-साल सुधार हुआ, वहीं खर्च और उधार भी बढ़े. बढ़ते अंतर के कारण नई Government की फिस्कल स्ट्रैटेजी (वित्तीय रणनीति) की जांच-पड़ताल और कड़ी होने की संभावना है, खासकर कर्ज, ब्याज देनदारियों और लगातार बने हुए रेवेन्यू घाटे को कंट्रोल करते हुए वादा की गई योजनाओं के लिए फंड जुटाने की उसकी क्षमता को लेकर.
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एसडी/एएस