तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निवेश राज्य में ही रहे: दिनाकरन

चेन्नई, 8 जून . एएमएमके के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने Monday को तमिलनाडु Government की प्रमुख औद्योगिक निवेशों को राज्य में बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठाया. यह सवाल तब उठा जब खबरें आईं कि थूथुकुडी में 29,000 करोड़ रुपए की परियोजना के लिए पूर्व तमिलनाडु Government के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाली मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने अब आंध्र प्रदेश Government के साथ समझौता कर लिया है.

एक बयान में, दिनाकरन ने कहा कि यह घटनाक्रम गंभीर चिंता का विषय है और राज्य की औद्योगिक नीति और निवेश अनुवर्ती तंत्र पर सवाल खड़े करता है.

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि अगर राज्य Government के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनियां बाद में पड़ोसी राज्यों में निवेश करना चुनती हैं, तो तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था कैसे विकसित हो सकती है.

मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एमडीएल ने पिछली Government के दौरान थूथुकुडी में बड़े पैमाने पर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी. हालांकि, अब जब कंपनी आंध्र प्रदेश में एक परियोजना पर आगे बढ़ रही है, तो इस बात पर चिंताएं बढ़ गई हैं कि क्या तमिलनाडु निवेश प्रतिबद्धताओं को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहा है.

दिनाकरन ने Government पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि social media प्लेटफॉर्म पर Chief Minister सी. जोसेफ विजय, उद्योग मंत्री और बहुराष्ट्रीय निगमों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बैठकों को अक्सर दिखाया जाता है, लेकिन इस बात की बहुत कम जानकारी उपलब्ध है कि क्या उन बैठकों के परिणामस्वरूप ठोस समझौते, निवेश या रोजगार सृजन हुए हैं.

उन्होंने कहा कि जनता को अभी तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि घोषित निवेश प्रस्तावों में से कितने परिचालन परियोजनाओं में परिवर्तित हुए हैं या राज्य के युवाओं के लिए रोजगार सृजित किए हैं.

एएमएमके नेता ने कहा कि तमिलनाडु को परंपरागत रूप से India के सबसे औद्योगिक रूप से उन्नत राज्यों में से एक माना जाता रहा है, जहां मजबूत बुनियादी ढांचा, विनिर्माण क्षमताएं और कुशल कार्यबल मौजूद हैं.

उन्होंने दावा किया कि Government परिवर्तन के बाद, निवेश आकर्षित करने और उसे बनाए रखने के मामले में पड़ोसी राज्यों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने की राज्य की क्षमता को लेकर चिंताएं उभर रही हैं.

एमएस/

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