Supreme Court ने बीएलओ की सुरक्षा पर जारी किया नोटिस

New Delhi, 9 दिसंबर . पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में शामिल बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की सुरक्षा को लेकर Supreme Court ने नया नोटिस जारी किया है. यह कदम राज्य में बीएलओ की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और उनके कार्यभार के बढ़ते दबाव के मद्देनजर उठाया गया है.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि तमाम राजनेता इस मुद्दे को लेकर कोर्ट पहुंच रहे हैं. ऐसा लगता है कि यह मंच उन्हें हाईलाइट करने का माध्यम बन गया है.”

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि बीएलओ पर बढ़ती धमकियों और हिंसा के कई मामलों में सिर्फ एक First Information Report दर्ज है. याचिका में उठाई गई बाकी हिंसा की घटनाएं पुरानी हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम तौर पर चुनाव से पहले Police प्रशासन सीधे चुनाव आयोग के नियंत्रण में नहीं दिया जाता.

चुनाव आयोग के वकील ने भी बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग का समर्थन किया.

गौरतलब है कि इससे पहले 4 दिसंबर को बीएलओ की मौत पर तमिलनाडु की Political पार्टी टीवीके द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान Supreme Court ने बीएलओ की मौतों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी. कोर्ट ने कहा था कि बीएलओ पर बढ़ते काम के बोझ को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती तत्काल की जानी चाहिए. देशभर में अब तक लगभग 35-40 बीएलओ अत्यधिक कार्यभार और तनाव के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं. याचिकाकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की थी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस बागची की पीठ ने कहा था कि एसआईआर प्रक्रिया एक वैध प्रशासनिक कार्रवाई है, जिसे समय पर पूरा करना बेहद आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि कहीं स्टाफ की कमी है, तो राज्य Governmentों को अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त करने का कार्य करना अनिवार्य है.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि बीमार, असमर्थ या अत्यधिक दबाव में काम कर रहे अधिकारियों के लिए राज्य Governmentों को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए और तुरंत वैकल्पिक स्टाफ तैनात करना चाहिए. इससे बीएलओ के कार्य घंटे कम होंगे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी.

वीकेयू/एएस

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