पश्चिम बंगाल में एसआईआर मामले पर Supreme Court सख्त, जांच सीबीआई या एनआईए को सौंपने के निर्देश

कोलकाता, 2 अप्रैल . पश्चिम बंगाल के एसआईआर मामले को लेकर Supreme Court ने कड़ी नाराज़गी जताई है. अदालत ने न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ हुए धरने और घेराव की घटना को बेहद गंभीर बताया है. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें घटना की विस्तृत जानकारी दी गई है.

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इस बात पर चिंता जताई कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा Police और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बावजूद वे घटनास्थल पर काफी देर से पहुंचे.

उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही करार दिया. अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश है बल्कि यह सीधे तौर पर न्यायपालिका को चुनौती देने जैसा है.

Supreme Court ने कहा कि संबंधित न्यायिक अधिकारी अदालत के निर्देशों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य Government की जिम्मेदारी है. सीजेआई ने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं लगती बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चल रही प्रक्रिया में बाधा डालना था. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

मामले की गंभीरता को देखते हुए Supreme Court ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस घटना की जांच सीबीआई या एनआईए से कराए. साथ ही, जांच एजेंसी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे Supreme Court में प्रस्तुत करने को कहा गया है. कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी, ज़िलाधिकारी और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

अदालत ने इन सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 6 अप्रैल को शाम 4 बजे ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित हों और यह स्पष्ट करें कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. इस मामले में Supreme Court की सख्ती से यह साफ संकेत मिल रहा है कि न्यायपालिका किसी भी तरह की लापरवाही या कानून व्यवस्था में बाधा को बर्दाश्त नहीं करेगी.

एसएचके/पीएम

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