
New Delhi, 20 अगस्त . उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर Supreme Court में Thursday को सुनवाई टल गई. कोर्ट ने केंद्र Government और यूजीसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा कि जवाब की कॉपी सभी याचिकाकर्ताओं को भी दी जाए. अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी.
याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उन्हें केंद्र और यूजीसी के जवाब की कॉपी नहीं मिली है.
पिछली सुनवाई में Supreme Court ने यूजीसी के इस नियम पर अंतरिम रोक लगा दी थी और केंद्र Government तथा यूजीसी को नोटिस जारी किया था.
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम, 2026’ अधिसूचित किया था. इसी नियम के एक प्रावधान को याचिका में चुनौती दी गई है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियम का खंड 3(सी) मनमाना और भेदभावपूर्ण है. इससे कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर किया जा सकता है. यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.
इसके अलावा याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ है. उनके मुताबिक इससे उच्च शिक्षा में सभी को समान अवसर देने के उद्देश्य को नुकसान पहुंचेगा.
यूजीसी ने यह नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाया था. लेकिन अब कोर्ट में इसे लेकर कानूनी बहस शुरू हो गई है. अब सभी पक्षों का जवाब आने के बाद Supreme Court चार हफ्ते बाद इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा.
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