Supreme Court ने एनएसई की पूर्व सीईओ की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से किया इनकार

New Delhi, 15 सितंबर . Supreme Court ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है.

चित्रा रामकृष्ण ने सीबीआई की कार्रवाई को चुनौती देते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत खुद को ‘पब्लिक सर्वेंट’ माने जाने पर सवाल उठाया था. उनका तर्क था कि एनएसई निजी संस्था है और वह किसी Governmentी या नियामक व्यवस्था के कारण पद पर नहीं थीं.

सुनवाई के चित्रा रामकृष्ण के वकील बलबीर सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ आईपीसी की कार्यवाही पर उन्हें आपत्ति नहीं है लेकिन पीसी एक्ट लागू नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने पूछा कि क्या उन्होंने डिस्चार्ज एप्लीकेशन दाखिल की है. कोर्ट ने कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट यह पाता है कि आरोपी ‘पब्लिक सर्वेंट’ नहीं हैं, तो इससे स्पेशल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र खत्म नहीं हो जाता.

Supreme Court ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में कोई गलती नहीं है. कोर्ट ने कहा कि रामकृष्ण एनएसई की एमडी और सीईओ थीं और यह सवाल कि एनएसई गैर-Governmentी/निजी कंपनी होने के कारण क्या वह पब्लिक ड्यूटी निभा रही थीं, ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है. Supreme Court ने निर्देश दिया कि इस मुद्दे का फैसला ट्रायल कोर्ट अपने गुण-दोष के आधार पर करे.

इसके पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने चित्रा रामकृष्ण की भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लोक सेवक और लोक सेवा की परिभाषा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट ने कहा था कि एनएसई लोकसेवा का कार्य करती है और चित्रा रामकृष्ण पूर्व सीईओ और एमडी होने के नाते एनएसई की ओर से किए गए कार्य से खुद को अलग नहीं कर सकती.

ओपी/पीएम

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