शानदार नौकरी छोड़ फिल्मों में आए सुजॉय घोष, सस्पेंस-थ्रिलर की दुनिया में बनाई अलग पहचान

Mumbai , 20 मई . Bollywood निर्देशक सुजॉय घोष ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में दीं, जिनमें रहस्य और रोमांच का मेल देखने को मिला. खास बात यह है कि सुजॉय घोष का सफर सीधे फिल्मी दुनिया से शुरू नहीं हुआ था. वह पहले एक बड़ी मीडिया कंपनी में उच्च पद पर काम करते थे, लेकिन फिल्मों के प्रति उनका प्यार इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर निर्देशन की दुनिया में कदम रख दिया. आज सुजॉय घोष को Bollywood में सबसे अलग सोच वाले निर्देशकों में गिना जाता है.

सुजॉय घोष का जन्म 21 मई 1966 को कोलकाता में हुआ था, लेकिन करीब 13 साल की उम्र में वह लंदन चले गए और वहां उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की. बाद में उन्होंने मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद सुजॉय घोष ने एक मीडिया कंपनी में काम शुरू किया और दक्षिण एशिया मीडिया विभाग के प्रमुख बने. उस समय उनकी नौकरी बेहद शानदार मानी जाती थी.

हालांकि, सुजॉय घोष का मन हमेशा फिल्मों और कहानियों की दुनिया में लगता था. उन्हें बचपन से ही सिनेमा देखने और नई कहानियां सोचने का शौक था. यही वजह रही कि उन्होंने साल 1999 में अपनी शानदार नौकरी को छोड़ने का फैसला लिया. यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि उस समय उनके पास एक सफल करियर था, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को चुना. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने पूरी तरह फिल्म निर्माण और लेखन पर ध्यान देना शुरू कर दिया.

साल 2003 में सुजॉय घोष ने बतौर निर्देशक फिल्म ‘झंकार बीट्स’ से Bollywood में कदम रखा. यह फिल्म मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन को श्रद्धांजलि के तौर पर बनाई गई थी. फिल्म का संगीत और कहानी लोगों को काफी पसंद आई. हालांकि यह हिट नहीं थी, लेकिन इस फिल्म ने सुजॉय घोष को एक नए और अलग सोच वाले निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई.

इसके बाद उन्होंने ‘होम डिलीवरी’ और ‘अलादीन’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सकीं.

साल 2012 में सुजॉय घोष ने वह फिल्म बनाई, जिसने उनकी किस्मत बदल दी. यह फिल्म थी ‘कहानी’. विद्या बालन स्टारर फिल्म सस्पेंस-थ्रिलर से भरपूर थी. कोलकाता की गलियों में घूमती एक गर्भवती महिला की कहानी ने लोगों को अंत तक बांधे रखा. फिल्म की कहानी, निर्देशन और सस्पेंस को खूब सराहा गया. ‘कहानी’ को कई बड़े पुरस्कार मिले, जिनमें राष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल था. फिल्म के बाद सुजॉय घोष Bollywood में सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों के मास्टर माने जाने लगे.

सुजॉय घोष ने इसके बाद ‘कहानी 2’, ‘बदला’, ‘टाइपराइटर’ और ‘जाने जां’ जैसी फिल्मों और सीरीज पर काम किया. अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की फिल्म ‘बदला’ भी दर्शकों को बेहद पसंद आई थी. इसके अलावा, उनकी शॉर्ट फिल्म ‘अहल्या’ ने भी खूब चर्चा बटोरी थी.

बहुत कम लोग जानते हैं कि सुजॉय घोष ने आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स का मशहूर नारा ‘कोरबो लोरबो जीतबो रे’ भी लिखा था. निर्देशन के साथ-साथ वह लेखन और अभिनय में भी हाथ आजमा चुके हैं. उन्होंने बंगाली फिल्मों में अभिनय भी किया है.

सुजॉय घोष आज भी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और लगातार नई कहानियों पर काम कर रहे हैं.

पीके/एबीएम

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