पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती हमला, पुलिसकर्मी की मौत, तीन घायल

इस्लामाबाद, 1 दिसंबर . Pakistan का खैबर पख्तूनख्वा एक बार फिर आत्मघाती हमले का शिकार हुआ है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रांत के लक्की मरवत जिले में Monday को एक सुरक्षा गाड़ी को निशाना बनाया गया. धमाके में एक Policeकर्मी की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए.

लक्की मरवत जिला Police अधिकारियों के प्रवक्ता आसिफ हसन ने बताया कि एक आत्मघाती धमाके में ताजोरी Police की गाड़ी को टारगेट किया गया. मरने वाले की पहचान हेड constable अलाउद्दीन के तौर पर हुई है.

Pakistan के मीडिया आउटलेट डॉन ने बताया कि आत्मघाती का साथी मौके से फरार हो गया. Police और सुरक्षा बल कर्मियों ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया.

Pakistan में पिछले साल, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में, आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है. नवंबर 2022 में तहरीक-ए-तालिबान Pakistan (टीटीपी) Government के साथ युद्धविराम समझौता टूट जाने के बाद से इसमें वृद्धि देखी गई है.

हालिया हमलों की बात करें तो 24 नवंबर को, खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले के डोमेल में एक लिंक रोड पर हथियारबंद बंदूकधारियों ने Pakistanी सिक्योरिटी फोर्स की गाड़ी को निशाना बनाया था, जिसमें एक सैनिक घायल हो गया था.

एक Policeवाले ने बताया था कि घायल सैनिक को बन्नू छावनी के अस्पताल ले जाया गया. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक सिक्योरिटी फोर्स और Police ने पूरे इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया और इस दौरान कई “आतंकी” मारे गए और घायल हुए. दावा किया गया कि सुरक्षाकर्मियों ने मौके से फरार हो रहे हमलावरों को पकड़ने के लिए इलाके को घेर लिया था.

8 नवंबर को, खैबर पख्तूनख्वा की खार तहसील के तांगी इलाके में चेकपोस्ट पर हमला किया गया था जिसमें एक Police अधिकारी घायल हो गया था.

इस बीच, इस्लामाबाद के सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) ने अपनी नवीनतम सुरक्षा रिपोर्ट में बताया कि Pakistan में 2025 की तीसरी तिमाही में कुल हिंसा में 46 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान Pakistan में कम से कम 901 मौतें हुईं और 599 लोग घायल हुए, जिनमें आम जनता, सुरक्षाकर्मी और हमलावर या अपराधी भी शामिल थे. हिंसा की कुल 329 वारदातें हुईं, जिनमें आतंकी हमले और आतंक-विरोधी अभियान भी शामिल हैं.

Pakistan में जनवरी और सितंबर 2024 (क्यू1-क्यू3) के बीच 1,527 मौतें हुईं. 2025 में आंकड़ा बढ़ा और 2,414 मौतों तक पहुंच गया. ये हिंसा में 58 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है. हालांकि, मौतों की वजहों में बड़ा बदलाव दिखा है. 2024 में सिक्योरिटी ऑपरेशन की वजह से 505 मौतें हुईं, जबकि आतंकी हमले की वजह से 1,022 लोग मारे गए थे.

सीआरएसएस रिपोर्ट आगे कहती है: “इस तिमाही में देश में 96 प्रतिशत से ज्यादा हिंसा के मामले खैबर पख्तूनख्वा (केपी) और बलूचिस्तान में रिकॉर्ड हुए, जिससे पता चलता है कि ये सबसे ज्यादा अस्थिर प्रांत रहे. केपी का हाल सबसे बुरा रहा, जहां हिंसा से जुड़ी कुल मौतों में से लगभग 71 प्रतिशत (638) और हिंसा की 67 प्रतिशत (221) से ज्यादा वारदातें हुईं, इसके बाद बलूचिस्तान का नंबर आता है, जहां 25 प्रतिशत से ज्यादा मौतें (230) और वारदातें (85) हुईं. बाकी सभी इलाकों में दर्ज मौतों, घायलों और वारदातों की संख्या काफी कम रही.”

केआर/

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