
कोटा, 29 जुलाई . Lok Sabha से ‘एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल’ पारित होने के बाद कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने इसका स्वागत किया है. छात्रों का कहना है कि यह विधेयक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इसके प्रभावी और दीर्घकालिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी. छात्रों ने कहा कि Government को केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार भी करने होंगे.
छात्र आयुष ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरी तरह बंद होनी चाहिए क्योंकि लाखों छात्र वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं. उन्होंने कहा कि कई छात्र डबल और ट्रिपल ड्रॉप लेकर तैयारी करते हैं और यदि परीक्षा का पेपर लीक हो जाए तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है. उन्होंने सुझाव दिया कि Government को एनटीए में भी सुधार करने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों. सजा के प्रावधान पर उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने इस कारण आत्महत्या कर ली, उनके परिवारों के लिए यह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता, लेकिन Government को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में कोई भी पेपर लीक न हो और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह व्यवस्थित एवं निष्पक्ष तरीके से संचालित हो.
छात्र गौरव ने कहा कि जिन छात्रों ने मानसिक तनाव में अपनी जान गंवाई, उनके लिए भी Government को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. अब जो हो गया, उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए. यदि भविष्य में फिर किसी परीक्षा का पेपर लीक हुआ तो विरोध पहले से अधिक उग्र हो सकता है. जुर्माने की राशि और अधिक होनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति गलती से भी ऐसा अपराध करने की हिम्मत न कर सके. एक पेपर लीक होने से छात्रों का पूरा वर्ष बर्बाद हो जाता है और लंबे समय तक मानसिक तनाव झेलना पड़ता है. इसलिए Government को परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत करनी चाहिए.
आदित्य कुमार ने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि मैंने इसके बारे में पढ़ा है और यह एक अच्छा कदम है, लेकिन किसी भी कानून की असली परीक्षा उसके लॉन्ग टर्म इम्प्लीमेंटेशन में होती है. शुरुआत में माहौल सकारात्मक रहता है, लेकिन जरूरी यह है कि आने वाले वर्षों में भी इसका प्रभाव दिखाई दे और पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हों. शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है. सजा के प्रावधानों पर उन्होंने कहा कि पेपर लीक के कारण छात्रों को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ता है और कई मामलों में छात्र आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं. उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उन्हें लेकर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.
छात्रा दिव्या ने कहा कि नए नियम मेहनती छात्रों के हित में हैं क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र दो-दो साल तक पूरी मेहनत करते हैं. यदि परीक्षा का पेपर लीक हो जाए तो इसका उनके भविष्य और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है. कई छात्र इस कारण आत्महत्या तक कर लेते हैं, इसलिए कानून और भी कठोर होना चाहिए. प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को उचित मुआवजा भी मिलना चाहिए. केवल 10 करोड़ रुपए का जुर्माना पर्याप्त नहीं है. यदि किसी व्यक्ति ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद किया है तो उसके लिए आजीवन कारावास जैसे कठोर प्रावधान होने चाहिए.
वहीं, छात्र आदिश श्रीवास्तव ने कहा कि बिल पारित होने के बाद युवाओं के बीच खुशी का माहौल है. उन्होंने इसे छात्रों की एकजुटता का परिणाम बताते हुए कहा कि युवाओं द्वारा किए गए आंदोलन ने अपनी बात Government तक पहुंचाई. यदि छात्र इसी तरह संगठित रहेंगे तो भविष्य में भी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सात वर्ष की सजा पूरी तरह पर्याप्त नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति को सुधार का अवसर भी मिलना चाहिए.
–
पीएसके