रणनीतिक तैयारी और मजबूत कूटनीति ने भारत को ईंधन संकट से बचाया: पूर्व आईओसीएल चेयरमैन

New Delhi, 30 जून . इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के पूर्व चेयरमैन बी. अशोक ने Tuesday को कहा कि हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए भू-Political तनाव के बावजूद India बड़े ईंधन और ऊर्जा संकट से बचने में सफल रहा.

आईओसीएल के पूर्व चेयरमैन बी. अशोक ने न्यूज एजेंसी को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि पिछले एक दशक में की गई रणनीतिक तैयारियां, ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार और Government की त्वरित कूटनीतिक पहल इस सफलता की सबसे बड़ी वजह रही. उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों के कारण India ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को केवल 7 प्रतिशत तक सीमित रखने और घरेलू एलपीजी आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने में सफल रहा.

बी. अशोक ने आगे बताया कि संकट शुरू होने से पहले India अपने कुल कच्चे तेल का लगभग 45 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए करता था, जबकि 55 प्रतिशत अन्य क्षेत्रों से आता था. लेकिन कुछ ही सप्ताह में India ने गैर-होर्मुज स्रोतों से आयात बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया.

उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई वर्षों की रणनीतिक तैयारी का परिणाम था. लगभग एक दशक पहले India केवल 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, जबकि 2026 तक यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई. अलग-अलग देशों से तेल खरीदने के लिए केवल व्यापारिक समझौते ही नहीं, बल्कि विभिन्न कानूनी व्यवस्थाओं, बंदरगाहों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयारी भी करनी पड़ती है.

पूर्व आईओसीएल चेयरमैन ने से बातचीत में आगे कहा कि आज India की आधुनिक रिफाइनरियां विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं. पहले रिफाइनरियां केवल एक विशेष प्रकार के कच्चे तेल के लिए डिजाइन की जाती थीं, लेकिन तकनीकी उन्नयन के बाद अब वे अलग-अलग गुणवत्ता वाले क्रूड को आसानी से रिफाइन कर सकती हैं.

उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक्स भी बड़ी चुनौती थी. मध्य पूर्व से आने वाला तेल पांच दिन में India पहुंच जाता है, जबकि अमेरिका जैसे देशों से तेल आने में 30 दिन तक लग सकते हैं. इसके बावजूद मजबूत आपूर्ति शृंखला और बेहतर पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते India ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया.

बी. अशोक ने आगे कहा कि India में 85 से 90 प्रतिशत ईंधन की आपूर्ति सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां करती हैं. ऐसे में Government का पहला उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को राहत देना था.

उन्होंने बताया कि Government ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की, जिससे बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर काफी हद तक कम हो गया. इसके अलावा, तेल कंपनियों को खुद अतिरिक्त लागत वहन करने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने के निर्देश दिए गए. इसके लिए कंपनियों ने महंगे कच्चे तेल की खरीद के लिए अतिरिक्त पूंजी भी जुटाई.

उन्होंने कहा कि निजी रिफाइनरियों को ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर निर्यात करने से रोकने के लिए Government ने निर्यात शुल्क भी लगाया, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे.

एलपीजी आपूर्ति को लेकर बी. अशोक ने कहा कि यह चुनौती कच्चे तेल से भी बड़ी थी. India अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 65 प्रतिशत आयात करता था, जिसमें करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती थी.

उन्होंने Government के फैसले की प्रशंसा करते हुए कहा कि संकट के दौरान केंद्र ने तुरंत एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर लागू किया और घरेलू रिफाइनरियों को अधिकतम एलपीजी उत्पादन करने का निर्देश दिया. पेट्रोकेमिकल्स के लिए इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोकार्बन को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ दिया गया, जिससे घरेलू उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई.

उन्होंने बताया कि केंद्र ने घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, क्योंकि देश में करीब 90 प्रतिशत एलपीजी की खपत घरों में होती है. शुरुआत में व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को सीमित आपूर्ति दी गई, लेकिन बाद में होटल, रेस्तरां और उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति को संतुलित किया गया.

बी. अशोक ने कहा कि संकट के दौरान India की संतुलित विदेश नीति और सभी संबंधित देशों के साथ मजबूत संबंधों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. Government ने विभिन्न देशों के साथ तेजी से उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत की, जिसके चलते संघर्ष के माहौल में भी एलपीजी और अन्य जरूरी ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति बाधित नहीं हुई.

उन्होंने बताया कि देश में अब लगभग 99 प्रतिशत घरों तक एलपीजी की पहुंच हो चुकी है. ऐसे में Government की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी घर में रसोई गैस की कमी न हो.

आईओसीएल के पूर्व चेयरमैन ने आगे को बताया कि व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति सीमित होने के बाद घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडरों के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ गया था, जिसे रोकने के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू किया गया, जिससे घरेलू सिलेंडरों की अवैध बिक्री पर प्रभावी रोक लगी और किसी भी क्षेत्र में एलपीजी की कमी नहीं होने दी गई.

बी. अशोक ने कहा कि Government ने आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी तेजी से बढ़ावा दिया. India अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग 50 प्रतिशत जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरी करता है. जिन शहरों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध था, वहां इसके उपयोग को प्रोत्साहित किया गया. उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी.

डीबीपी

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