‘काउंटिंग की जिम्मेदारी स्टेट बैंक की थी’, राम मंदिर चंदा विवाद पर ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता का दावा

अयोध्या, 2 जुलाई . राम मंदिर चंदे को लेकर चल रहे विवाद पर ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट के नियमों और उसकी भूमिका को लेकर ट्रस्टी ही जानकारी दे सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि चंदे की गिनती की जिम्मेदारी स्टेट बैंक की थी और ट्रस्ट का इससे कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था.

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के बारे में ट्रस्टी ही बता सकते हैं. Supreme Court के आदेश पर ट्रस्ट गठित हुआ और नियम बनाए गए. नियमों के बारे में विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन इतना जरूर पता है कि ट्रस्ट में एक प्रतिनिधि केंद्र Government का है, एक प्रतिनिधि राज्य Government का है और एक प्रतिनिधि स्थानीय आधार पर जिलाधिकारी होता है. अब इन सबकी देखरेख में ट्रस्ट काम करता है. अब उसमें तो केंद्र Government के प्रतिनिधि हैं, स्टेट के भी प्रतिनिधि हैं, स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी हैं, तो ट्रस्ट तो इन्हीं सब लोगों के देखरेख में बना है और देखरेख में काम करता है. अब ये बता सकते हैं कि ये क्या भूमिका निभाएंगे?

उन्होंने कहा कि अब ट्रस्ट के संज्ञान में तो था नहीं. स्टेट बैंक की जिम्मेदारी थी. वो काउंटिंग करते थे. उनके आदमी काउंटिंग में लाए जाते थे, क्योंकि ट्रस्ट का एग्रीमेंट स्टेट बैंक से था. देखरेख के लिए ट्रस्ट का एक आदमी जरूर रहता था. लेकिन, वो नहीं समझता था कि ये लोग चोर हैं, चोरी कर रहे हैं. इस मामले में अब जांच जारी है.

उन्होंने चंदा चोरी के आरोपों पर कहा कि आरोप लगाने के लिए किसी पर कोई रोक है क्या? किसी पर आरोप लगा दें आप और जो ट्रस्ट के हमेशा विरोधी रहे, वो आरोप लगाएंगे ही या जो विपरीत मानसिकता के लोग हैं, वो आरोप लगाएंगे. लेकिन, जो आदमी जानता है कि इसमें ट्रस्ट के लोगों का कोई संबंध नहीं है, स्टेट बैंक से संबंध था, करार था कि वो काउंटिंग करेंगे और गिनती करेंगे और बैंक में जमा करेंगे. मेरी समझ में बैंक कर्मियों द्वारा गड़बड़ी की गई. इसका संबंध न ट्रस्ट से है और न कोई ट्रस्ट के लोगों से है.

आरोपियों की गिरफ्तारी पर प्रकाश गुप्ता ने कहा कि ये सब लोग काउंटिंग में थे. टिन्नू यादव की जिम्मेदारी काउंटिंग कराने की थी. कैंपस के अंदर की जो भी देखरेख होती थी, वो टिन्नू यादव करते थे, क्योंकि हर आदमी को अधिकार नहीं था कि वो कैंपस के अंदर चला जाए. टिन्नू पुराना आदमी था, तो उसे ये जिम्मेदारी दी गई थी कि किसी को दर्शन कराना है, वीआईपी दर्शन कराना है, तो वो व्यक्ति कराता था. काउंटिंग में ट्रस्ट का कोई काम नहीं था. स्टेट बैंक से एग्रीमेंट था. स्टेट बैंक के लोग अपने काउंटिंग करने वाले लोगों को लाते थे. वो उनके कर्मचारी नहीं थे. वो दैनिक भुगतान वाले लोगों को लाते थे. अब कौन आदमी थे, क्या थे, इसको तो लाने वाला जाने. हम लोगों का उसके साथ संबंध ही नहीं था कोई.

पीएसके/एबीएम

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