‘स्टालिन सरकार महिलाओं की सुरक्षा में नाकाम’, गौतमी का आरोप

कोयंबटूर, 16 मार्च . Actress और Political कार्यकर्ता गौतमी ने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (डीएमके) Government पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि Chief Minister एमके स्टालिन के नेतृत्व में राज्य की महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं.

उन्होंने ये टिप्पणियां कोयंबटूर में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (एआईएडीएमके) द्वारा आयोजित महिला दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की.

सभा को संबोधित करते हुए गौतमी ने कहा कि दिवंगत Chief Minister जे. जयललिता के कार्यकाल के दौरान तमिलनाडु में महिला कल्याण के प्रति एक अलग दृष्टिकोण देखने को मिला था.

उनके अनुसार, जयललिता अपने जीवन के अंत तक महिलाओं के कल्याण और सशक्तीकरण के प्रति समर्पित रहीं और उन्होंने उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से कई योजनाएं लागू कीं. इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान Government महिलाओं को मुख्य रूप से ‘वोट बैंक’ के रूप में देखती है.

गौतमी ने दावा किया कि मौजूदा प्रशासन राज्य भर में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में विफल रहा है.

उन्होंने कहा कि Chief Minister स्टालिन के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों और शासन शैली में उस संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का अभाव था, जिसकी महिलाएं Government से अपेक्षा करती हैं.

एआईएडीएमके के नेतृत्व का जिक्र करते हुए, उन्होंने पार्टी के महासचिव और पूर्व Chief Minister एके. पलानीस्वामी की प्रशंसा की और दावा किया कि उन्होंने तमिलनाडु में महिलाओं के अधिकारों को बहाल करने और उनकी रक्षा करने के लिए लगभग 28 महीनों तक संघर्ष किया.

उन्होंने आगे कहा कि एआईएडीएमके Government द्वारा पहले शुरू किए गए कई कल्याणकारी उपायों को वर्तमान Government के तहत कमजोर कर दिया गया है या उनमें देरी की गई है. गौतमी ने जयललिता के कार्यकाल में शुरू की गई स्कूली छात्रों के लिए लैपटॉप वितरण योजना का भी जिक्र किया.

उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन Government ने अपने कार्यकाल के अंत में ही इस कार्यक्रम को पुनर्जीवित किया था, और दावा किया कि यह निर्णय छात्रों के कल्याण के लिए वास्तविक चिंता के बजाय चुनावी विचारों से प्रेरित था.

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान, गौतमी ने विलाथिकुलम में दुष्कर्म और हत्या के मामले पर डीएमके की सांसद कनिमोझी करुणानिधि की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की.

गौतमी ने कनिमोझी के बयान को असंवेदनशील और पीड़िता के साथ ही उसके परिवार के प्रति सहानुभूति की कमी वाला बताया.

उन्होंने सवाल उठाया कि Political नेताओं ने पीड़ित परिवार को समर्थन या सांत्वना देने के लिए प्रभावित क्षेत्र का दौरा क्यों नहीं किया.

गौतमी ने यह भी पूछा कि अन्य घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने में अधिक तत्परता क्यों दिखाई देती है, जबकि विलाथिकुलम मामले पर समान ध्यान नहीं दिया गया.

गौतमी ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में नशीले पदार्थों का प्रसार एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है और उन्होंने प्रशासन पर इस खतरे को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया, जिससे वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को नुकसान पहुंच सकता है.

गौतमी ने भविष्यवाणी की कि मुकाबला मुख्य रूप से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा होगा और अन्य Political दल चुनावी लड़ाई में केवल मामूली भूमिका निभाएंगे.

एएसएच/एबीएम

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