श्रीलंका : भारतीय सेना ने हजारों पीड़ितों का किया उपचार, सेना के फील्ड हॉस्पिटल जाएंगे श्रीलंकाई राष्ट्रपति

New Delhi, 9 दिसंबर चक्रवात दित्वाह से प्रभावित श्रीलंका के कई इलाकों में स्वास्थ्य, सड़क, भोजन, पानी जैसे कई मानवीय संकट उत्पन्न हुए हैं. इस संकट के बीच, ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत भारतीय सेना ने श्रीलंका में 3,300 से अधिक मरीजों का इलाज किया है.

गौरतलब है कि शीघ्र ही श्रीलंका के President द्वारा अस्पताल का दौरा किए जाने की भी संभावना है. वहीं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए सड़क मार्ग की मरम्मत भी सेना द्वारा शुरू की गई है. भारतीय सेना यहां अनेक पुलों को ठीक या निर्माण कर रही है. सेना के मुताबिक 10 दिसंबर तक श्रीलंका में एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. जाफना और चिलाव में तीव्र प्रगति से ये कार्य पूरा किया जा रहा है.

भारतीय सेना यहां नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय में निरंतर राहत एवं पुनर्निर्माण कार्यों को गति दे रही है. इस अभियान में पुलों की पुनर्स्थापन और उच्चस्तरीय चिकित्सा सहायता प्रमुख रूप से शामिल हैं. भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने जाफना में क्षतिग्रस्त पुलियाम्पोक्कनाई ब्रिज के पैनलों को हटाने (डी-लॉन्चिंग) का कार्य प्रारंभ कर दिया है. इस कार्य में श्रीलंका के रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी को सेना सहयोग दे रही है.

सेना के मुताबिक, इस कार्य के लिए पहिएदार एक्सकेवेटर का प्रयोग किया जा रहा है. यह कार्य तेजी से प्रगति पर है और 10 दिसंबर तक पूर्ण होने की संभावना है. इसके बाद Saturday दोपहर को यहां पहले बेली ब्रिज को लॉन्च करने की योजना है. वहीं जाफना में 120 फीट के ड्यूल कैरिजवे के निर्माण हेतु आवश्यक सामग्री का 70 प्रतिशत पहले ही स्टोर यार्ड से साइट पर पहुंचाया जा चुका है. शेष सामग्री के Wednesday शाम तक पहुंचने की उम्मीद है.

चिलाव में अगले 48 घंटों के भीतर पुल के लिए पियर निर्माण शुरू किए जाने की संभावना है. एक पूर्ण बेली ब्रिज सेट पहले ही वहां पहुंच चुका है, जिससे पुनर्स्थापन प्रयासों को और मजबूती मिली है. सेना ने बताया कि इसी क्रम में चौथे बेली ब्रिज सेट की लोडिंग यहां India के पठानकोट में जारी है. यह बेली ब्रिज 09 दिसंबर को India से श्रीलंका रवाना किया जाएगा.

आत्मनिर्भर India और भारतीय सेना के आधुनिकीकरण व तकनीकी नवाचार की दिशा में यहां स्वदेशी ड्रोन व सोनार आधारित लेजर रेंज फाइंडर इस्तेमाल किए जा रहे हैं. रिमोटली ऑपरेटेड कॉम्बैट क्रूजर यूजीवी तथा अन्य नई पीढ़ी के उपकरणों को भी जाफना और चिलाव के पुल स्थलों पर विस्तृत टोही के लिए तैनात किया गया है. इससे ऑपरेशनल समय-सीमा में उल्लेखनीय तेजी आई है. वहीं भारतीय सेना के पैरा फील्ड हॉस्पिटल द्वारा उत्कृष्ट मानवीय चिकित्सा सेवाएं लगातार प्रदान की जा रही हैं. इस हॉस्पिटल में अब तक 3,338 मरीजों का उपचार किया जा चुका है.

सेना ने बताया कि 08 दिसंबर को ही अस्पताल में 1,128 मरीजों का इलाज किया गया. 73 छोटी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं व 4 सर्जरी की गई हैं. सेना के अनुसार स्थानीय समुदायों से अस्पताल को अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. सेना ने श्रीलंका में समन्वित इंजीनियरिंग प्रयासों, प्रभावशाली चिकित्सा सहायता और उन्नत स्वदेशी तकनीक की तैनाती की है. भारतीय सेना ने एक बार फिर ‘पड़ोसी प्रथम, और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के अनुरूप कार्य किया है. सेना के मुताबिक उनके ये कार्य संकट की इस घड़ी में श्रीलंका को मानवीय सहायता प्रदान करने की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हैं.

जीसीबी/एएस

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