
देहरादून, 10 मार्च . देवभूमि उत्तराखंड अपने पौराणिक मंदिरों और उनकी अनोखी कहानी-चमत्कारो के लिए प्रसिद्ध है. इन्हीं में से एक है देहरादून जिले के झाझरा में स्थित श्री बालाजी धाम. यह मंदिर Rajasthan के प्रसिद्ध बालाजी धाम की तर्ज पर बनाया गया है.
श्री बालाजी धाम मंदिर जीवन में चल रही नकारात्मकता को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है. यहां पर भक्तगण नकारात्मक शक्तियों, संकटों या बुरी ऊर्जा से मुक्ति के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. श्रद्धालु यहां पर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अर्जी लगाते हैं.
उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की खासियत पर जोर दिया है. Tuesday को उन्होंने अपने आधिकारिक social media प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर की खास वीडियो शेयर की. इसके साथ ही उन्होंने मंदिर और उसके महत्व पर जोर देते हुए लिखा, “देहरादून के झाझरा में स्थित श्री बालाजी धाम श्रद्धा और आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. Tuesday व Saturday के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और श्री हनुमान जी से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. आप भी देहरादून आगमन पर इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें.”
मंदिर की खास बात ये है कि यहां पर भक्तगढ़ बालाजी महाराज को लड्डू और भैरव बाबा को बताशा (या उड़द दाल से जुड़ा प्रसाद) अर्पित करते हैं, जबकि प्रेतराज जी के लिए घी, नारियल और बूरा अर्पित किया जाता है.
Tuesday और Saturday को भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. इन दिनों हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और हनुमान जी से आशीर्वाद मांगते हैं. ऐसी मान्यता है कि Tuesday और Saturday के दिन की गई प्रार्थना और अर्जी से फल मिलता है. मंदिर में एक बार अर्जी लगाई जाती है और सात बार भोग लगाया जाता है.
मंदिर की स्थापना बाबा रामकृष्ण दास बर्फानी ने साल 1957 में की थी. बालाजी धाम का प्रबंध बाबा बाल रामदास हठयोगी महाराज द्वारा किया जाता है. इस मंदिर में मुख्य रूप से बालाजी के बाल स्वरूप और भैरव बाबा प्रेत Government, भोलेनाथ, राधा कृष्ण और मां भगवती दुर्गी की भी पूजा होती है. मंदिर में एक बड़ा सा पेड़ है और इस पेड़ पर हजारों की संख्या में बालाजी को चोला चढ़ाया जाता है.
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एनएस/पीयूष