गाजा का गम और बांग्लादेश पर चुप्पी, सोनिया गांधी के लेख में ‘वोट बैंक’ की राजनीति सिमटी

New Delhi, 27 जून . कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख के जरिए न सिर्फ ‘गाजा का गम’ शेयर किया, बल्कि उन्होंने केंद्र की मौजूदा Government की गाजा और फिलिस्तीन नीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

उन्होंने लिखा, “संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट बताती है कि इजरायल, गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करने के इरादे से बच्चों को निशाना बना रहा है. इतनी गंभीर रिपोर्ट आने के बाद भी मोदी Government चुप है.”

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने लेख में दावा किया, “गाजा में अब तक कम से कम 20 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार बच्चे घायल हुए हैं. गाजा में मारे गए या घायल लोगों में 27 प्रतिशत बच्चे हैं. गाजा के 97 प्रतिशत स्कूल तबाह हो चुके हैं.” अपने लेख में सोनिया गांधी ने गाजा-फिलिस्तीन से जुड़े कई अन्य मानवीय पहलुओं से जुड़े मुद्दे को उठाया और इंसानियत का हवाला देते हुए केंद्र Government की चुप्पी पर सवाल करते हुए कड़े कदम उठाने की मांग की.

कहने का मतलब है कि सोनिया गांधी इजरायल की गाजा में की गई कार्रवाई के मुखर विरोध के समर्थन में हैं. इससे पहले उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजरायली हमले में मौत पर भी केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाए थे. सोनिया गांधी के लेख को देखें तो पिछले दो सालों में उन्होंने सात लेख लिखे हैं. इनमें तीन लेख गाजा और ईरान से जुड़े हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, इस तरह के लेख ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ का हिस्सा हैं, मतलब, चुनिंदा मामलों पर सवाल उठाना और Government को घेरना.

सोनिया गांधी के केंद्र Government और Prime Minister Narendra Modi पर गाजा मामले को लेकर चुप्पी के आरोप हैं. जबकि, Prime Minister मोदी ने कई बार और कई मौकों पर युद्ध की जगह बातचीत को प्राथमिकता देने की अपील है. चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्षों से शांति की अपील हो या गाजा का इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष. India ने हर बार युद्ध की जगह शांति और सामूहिक विकास के सिद्धांत को अपनाने की बात कही है.

India ने बार-बार फिलिस्तीनी लोगों और गाजा शांति योजना को अपना समर्थन दोहराया है. ईरान ने तो Prime Minister मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए यहां तक कहा कि India की आवाज क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद अहम है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया है कि India Government की गाजा और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर नीति ‘सभी के साथ जुड़ाव’ और रणनीतिक संतुलन पर आधारित है. यह नीति इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए फिलिस्तीन के लिए पारंपरिक समर्थन और मानवीय सहायता के बीच संतुलन साधने का प्रयास करती है. वहीं, India एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यावहारिक फिलिस्तीन राज्य के निर्माण का समर्थन करता है, जो इजरायल के साथ सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं में शांति से रह सके.

अगर पिछले कुछ महीनों के पैटर्न को देखें तो कहीं न कहीं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के लेख और Government से सवाल ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ के इर्द-गिर्द रहे हैं. फिलिस्तीन, इजरायल, यूक्रेन, रूस, पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों से लेकर अमेरिका ने भी India की नीति पर मुहर लगाई है, जिसके तहत India शांति और सह-अस्तित्व पर जोर देता रहा है. पिछले कुछ सालों में Prime Minister मोदी की नीति का नतीजा रहा कि India दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में न सिर्फ उभरा, वैश्विक मंचों पर भी अपनी दमदार उपस्थिति और धमक महसूस कराई. इसके बावजूद, बार-बार केंद्र Government को घेरने की वजह ‘वोट बैंक’ को माना जा रहा है.

अगर दो साल पहले के बांग्लादेश में चलें तो जिस तरह से सड़कों पर व्यापक हिंसा और हिंदुओं के खिलाफ जुल्म देखे गए, उसने ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ पर सवालिया निशान लगाने का काम किया है. छात्रों के आंदोलन की आड़ में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए गए. लगातार मॉब लिंचिंग, घरों-दुकानों में आगजनी और ईशनिंदा के झूठे मामलों में गिरफ्तारियां सामने आती रहीं. हिंसा का यह सिलसिला कमोबेश मौजूदा तारिक रहमान Government में भी जारी है.

इसके बावजूद, सोनिया गांधी ने हिंदुओं की दयनीय स्थिति पर कोई बयान नहीं दिया और न ही कोई लेख भी लिखे. हालांकि, कांग्रेस पार्टी केंद्र Government की बांग्लादेश नीति पर ही सवाल उठाती रही. यही पैटर्न नेपाल में भी देखने को मिला. कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने मोदी Government की विदेश नीति पर ही सवाल उठा दिए. उस मोदी Government की नीति पर जिसने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ पड़ोसियों से लेकर दुनिया के ताकतवर देशों तक संतुलित रिश्ते बनाकर ‘विकसित India 2047’ का लक्ष्य जनता के सामने रखा है.

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एबीएम/

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