सोशल मीडिया रिव्यू कभी-कभी बहुत परेशान करता है, लेकिन इससे दूर भागने का कोई रास्ता नहीं : राजकुमार संतोषी

Mumbai , 20 अगस्त . सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज होते ही social media पर लोगों की राय सामने आने लगती है. कोई कहानी की तारीफ करता है तो कोई कलाकारों के काम पर राय देता है. कई बार ये बातें फिल्म को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद करती हैं, तो कभी लगातार आने वाली नकारात्मक प्रतिक्रियाएं फिल्म से जुड़े लोगों के लिए परेशानी भी बन जाती हैं. इस पर फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी ने अपनी राय साझा की.

उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ को लेकर social media पर हो रही चर्चाओं के बीच उन्होंने कहा कि अब social media फिल्म की दुनिया का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है.

से राजकुमार संतोषी ने social media पर फिल्म रिव्यू को लेकर बात करते हुए कहा, “देखिए, social media एक बड़ा प्लेयर बन चुका है. वह अपना काम करेगा. कई बार यह बहुत परेशान करने वाला भी हो सकता है, लेकिन हमें इसकी आदत डालनी होगी. हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है. हमें social media के साथ ही रहना है.”

उन्होंने कहा, ”आज किसी भी फिल्म के प्रचार और मार्केटिंग में social media की बड़ी भूमिका है. फिल्म के बारे में लोगों तक जानकारी पहुंचाने से लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाने तक social media काफी अहम हो गया है.”

उनकी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की बात करें, तो यह फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. यह एक पीरियड ड्रामा है. इसमें सनी देओल, शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं.

फिल्म को लेकर social media पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. इस बीच इस्लामिक काउंसिल के चेयरमैन मुफ्ती मंजूर ने भी social media पर वीडियो साझा कर फिल्म की तारीफ की.

मुफ्ती मंजूर ने फिल्म में प्यार और इंसानियत के संदेश को खास बताया और राजकुमार संतोषी की तारीफ करते हुए कहा कि फिल्म में एक मां के प्यार को संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है. जिस समय नफरत की बातें ज्यादा सुनाई देती हैं, उस समय प्यार का संदेश देने वाली कहानी लोगों तक पहुंचना जरूरी है.

मुफ्ती मंजूर ने फिल्म के कलाकारों के काम की भी तारीफ की. उन्होंने सनी देओल, शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह के अभिनय को शानदार बताया.

‘बंटवारा 1947’ फिल्म को असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ई नई’ से प्रेरित माना जाता है.

पीके/एबीएम

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