
New Delhi, 26 फरवरी . केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Thursday को कहा कि social media प्लेटफॉर्म को कंटेंट बनाने वालों के साथ राजस्व (कमाई) का निष्पक्ष बंटवारा करना चाहिए. इसमें पत्रकार, पारंपरिक मीडिया संस्थान, इन्फ्लुएंसर, प्रोफेसर और शोधकर्ता शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि जो लोग कंटेंट बना रहे हैं, चाहे वे समाचार पेशेवर हों, दूर-दराज के इलाकों में बैठे क्रिएटर्स हों या अपने शोध साझा करने वाले अकादमिक विशेषज्ञ, वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली कमाई में उचित हिस्सेदारी के हकदार हैं.
उनके अनुसार, अब पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में निष्पक्ष राजस्व साझेदारी का सिद्धांत लागू किया जाना चाहिए.
Union Minister ने कहा, “social media प्लेटफॉर्म को कंटेंट बनाने वाले लोगों के साथ निष्पक्ष तरीके से राजस्व साझा करना चाहिए, चाहे वे न्यूज पर्सन हों, पारंपरिक मीडिया, दूर-दराज के क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर, प्रोफेसर या शोधकर्ता हों जो प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपने काम का प्रसार कर रहे हैं.”
उन्होंने जोर दिया कि प्लेटफॉर्म को व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा अपलोड किए गए कंटेंट से बड़ा लाभ मिलता है, इसलिए क्रिएटर्स को भी उनका उचित हिस्सा मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि राजस्व वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने से India की डिजिटल कंटेंट अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब Government डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमों को सख्त कर रही है.
एक अलग कदम के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने पिछले साल आईटी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव रखा था. इसका उद्देश्य डीपफेक और एआई से तैयार भ्रामक सामग्री (मिसलीडिंग कंटेंट) के बढ़ते खतरे से निPatna है.
मसौदा नियमों के तहत, social media प्लेटफॉर्म को ‘कृत्रिम रूप से तैयार कंटेंट’ (सिंथेटिक कंटेंट) को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा और उसमें स्थायी मेटाडेटा या पहचान चिह्न जोड़ना होगा.
India में 50 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले प्रमुख social media मध्यस्थ (एसएसएमआई), जैसे फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट, को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई से तैयार कंटेंट को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाए.
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, वीडियो या तस्वीर के मामले में पहचान चिह्न कम से कम 10 प्रतिशत दृश्य भाग में दिखना चाहिए, जबकि ऑडियो कंटेंट के मामले में अवधि के पहले 10 प्रतिशत हिस्से में इसे दर्शाना होगा.
मेटाडेटा को बदला, हटाया या दबाया नहीं जा सकेगा. यदि कोई प्लेटफॉर्म जानबूझकर बिना लेबल या गलत तरीके से घोषित एआई-जनित कंटेंट की अनुमति देता है, तो इसे आईटी एक्ट के तहत उचित सावधानी न बरतने के रूप में माना जाएगा.
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डीबीपी/