
New Delhi, 2 मार्च . भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित पारंपरिक ‘स्टिच्ड’ सेलिंग वेसल आईएनएसवी कौंडिन्य अपनी पहली विदेश यात्रा पूरी कर स्वदेश लौट आया है. India लौटने पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने Mumbai हार्बर में भारतीय नौसेना के सेलिंग पोत आईएनएसवी कौंडिन्य को औपचारिक रूप से ‘फ्लैग इन’ किया.
यह अवसर इसलिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह पोत अपनी पहली विदेशी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ओमान सल्तनत से अरब सागर पार करते हुए स्वदेश लौटा है. दरअसल यह यात्रा India और ओमान के बीच समुद्री संबंधों की ऐतिहासिक परंपरा की याद दिलाती है. सदियों पहले भारतीय नाविक और व्यापारी अरब देशों तक समुद्री मार्ग से व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क स्थापित करते थे. उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए यह पोत आधुनिक समय में पारंपरिक तकनीक के साथ समुद्र की लंबी यात्रा पर गया और सुरक्षित वापस लौटा.
आईएनएसवी कौंडिन्य को प्राचीन भारतीय ‘सिले हुए जहाज’ निर्माण तकनीक से तैयार किया गया है. इसमें नारियल की रस्सियों (कॉयर) और प्राकृतिक रेजिन का इस्तेमाल किया गया है. खास बात यह है कि जहाज के हिस्सों को लोहे की कीलों की बजाय पारंपरिक तरीके से सिला गया है. यह तकनीक प्राचीन India में प्रचलित थी और लंबे समय तक समुद्री व्यापार में इस्तेमाल होती रही. इस पोत का निर्माण भारतीय नौसेना की देखरेख में किया गया, जिससे परंपरा और आधुनिक समुद्री समझ का बेहतरीन मेल देखने को मिला.
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा केवल एक समुद्री अभियान नहीं, बल्कि India की समृद्ध समुद्री विरासत, कौशल और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि ऐसे प्रयास युवाओं को India के गौरवशाली समुद्री इतिहास से भी जोड़ते हैं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करते हैं. इस सफल अभियान ने यह भी दिखाया कि प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीक आज भी समुद्र की कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है. अरब सागर जैसे चुनौतीपूर्ण जल मार्ग को पार करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.
इस ऐतिहासिक वापसी के साथ आईएनएसवी कौंडिन्य ने न केवल अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी की, बल्कि India की समुद्री परंपरा को वैश्विक मंच पर एक बार फिर सम्मान दिलाया. यह अभियान आने वाले समय में India की समुद्री विरासत को और मजबूती से आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगा. आईएनएसवी कौंडिन्य अपनी पहली विदेश यात्रा पर 29 दिसंबर को Gujarat के पोरबंदर से ओमान की राजधानी मस्कट के लिए रवाना हुआ था. यह ऐतिहासिक यात्रा India की प्राचीन समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करने, समझने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का एक जीवंत प्रयास रहा.
यह भारतीय नौसैनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. कौंडिन्य को सदियों पुराने पारंपरिक ‘स्टिच्ड शिपबिल्डिंग’ तरीकों से बनाया गया है. नौसेना के मुताबिक, यह यात्रा उन प्राचीन समुद्री मार्गों को पुनर्जीवित करने में सफल रही है जो कभी India के पश्चिमी तट और ओमान के बीच व्यापार, सांस्कृतिक संपर्क और सभ्यतागत आदान-प्रदान का माध्यम रहे हैं. यह अभियान India और ओमान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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जीसीबी/डीएससी