
New Delhi, 14 मई . Supreme Court ने Thursday को रानी कपूर और प्रिया सचदेव कपूर से जुड़े हाईप्रोफाइल आरके फैमिली ट्रस्ट विवाद में रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (आरआईपीएल) की प्रस्तावित बोर्ड बैठक पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. साथ ही, कंपनी को मीटिंग के दौरान स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और अधिकृत बैंक हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव से जुड़े मुद्दे पर चर्चा करने से रोक दिया.
रानी कपूर की एक नई याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने यह निर्देश दिया है. रानी कपूर दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की मां हैं. उन्होंने 18 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग पर रोक लगाने की मांग की थी.
Supreme Court ने कहा कि चूंकि विवाद पहले ही मध्यस्थता के लिए भेजा जा चुका है, इसलिए दोनों पक्षों को ऐसे कोई भी कदम उठाने से बचना चाहिए, जिनका सीधा असर मध्यस्थता की कार्यवाही पर पड़ सकता हो. जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हमने मध्यस्थ से पहले ही अनुरोध किया है कि वे मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू करें. फिलहाल, हम विरोधी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे ऐसा कुछ भी न करें, जिसका सीधा असर मध्यस्थता पर पड़े. हमने बार-बार कहा है कि इस विवाद को खत्म करना सभी पक्षों के हित में होगा, वरना यह एक लंबी लड़ाई बन जाएगी.
रानी कपूर की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील नवीन पाहवा ने दलील दी कि प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि परिवार की ओर से नियंत्रित संस्थाओं के कामकाज से उन्हें ‘पूरी तरह से बाहर’ कर दिया जाए. पारिवारिक संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र करते हुए यह दलील दी गई कि ग्रुप कंपनियों में रानी कपूर की ज्यादातर शेयरहोल्डिंग कथित तौर पर उनकी सहमति के बिना ही एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी गई थी.
रानी कपूर की ओर से सीनियर वकील ने कहा कि मेरी शेयरहोल्डिंग मेरे पीठ पीछे एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी गई. सभी कंपनियों में ज्यादातर शेयर मेरे पास थे. मेरी बहू ने मेरी शेयरहोल्डिंग एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी.
वहीं, दूसरी ओर प्रिया सचदेव कपूर और आरआईपीएल सहित प्रतिवादियों की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, निरीक्षण के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार की जा रही है.
सिब्बल ने दलील दी कि प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग मुख्य रूप से कानूनी और नियामक दायित्वों का पालन करने के लिए बुलाई गई थी, न कि मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान मौजूदा स्थिति को बदलने के इरादे से.
दलीलों पर गौर करते हुए Supreme Court ने साफ किया कि बोर्ड मीटिंग तो हो सकती है, लेकिन स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और कुछ बैंक खातों के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव से जुड़े एजेंडा बिंदुओं पर फिलहाल कोई कार्रवाई न की जाए.
कोर्ट ने दोनों पक्षों से बार-बार आग्रह किया कि वे ईमानदारी से आपसी सुलह का प्रयास करें और उन्हें चेतावनी दी कि वे इस पारिवारिक विवाद को एक लंबी कानूनी लड़ाई में न बदलें. जस्टिस पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि वह (रानी कपूर) 80 साल की महिला हैं. हम सब खाली हाथ आए थे, और हमें खाली हाथ ही जाना है. हम अपने साथ सिर्फ़ अपनी आत्मा ले जाते हैं. मामले को सुलझाने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए. सिर्फ इसलिए मध्यस्थ के सामने भारी मन से न जाएं कि कोर्ट ने आपको ऐसा करने के लिए कहा है. आप में से हर कोई कोशिश करें.
बता दें कि यह ताजा याचिका आरआईपीएल की ओर से 8 मई को जारी एक नोटिस के बाद आई है, जिसमें 18 मई को बोर्ड मीटिंग बुलाई गई थी. रानी कपूर ने इस मीटिंग को “कोर्ट के आदेश पर हो रही मध्यस्थता प्रक्रिया को दरकिनार करने की एक धोखाधड़ी भरी कोशिश” बताया था, और कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की थी कि जब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी न हो जाए, तब तक कंपनी को यह मीटिंग करने से रोका जाए.
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एसडी/पीएम