
New Delhi, 27 अप्रैल . केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थान ने एक ऐसी रिसर्च की है, जो केवल कुछ ही सेकंड के भीतर खाद्य पदार्थों में मिलावट व मिलावट स्तर का सही माप बता सकती है. यह रिसर्च मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का तेजी से और सटीक पता लगाने में सक्षम है. इस तकनीक की सटीकता को देखते हुए इसे स्वीकृति प्रदान की गई है और पेटेंट भी दे दिया गया है.
यह तकनीक रियल-टाइम में मिलावट का पता लगाने के लिए उपयुक्त है. यह कामयाबी एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने हासिल की है. मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का तेजी से पता लगाने और उसका स्तर मापने में सक्षम यह एक विशेष प्रणाली है. दरअसल, खाद्य और मसालों में मिलावट गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक जोखिम पैदा करती है. यह अक्सर लागत कम करने की प्रवृत्ति और खाद्य सुरक्षा मानकों की अपर्याप्त जांच के कारण होती है.
पारंपरिक मिलावट जांच विधियां, जैसे क्रोमैटोग्राफी या आणविक तकनीकें, संसाधन-गहन होती हैं. ये तकनीकें परिणाम देने में अधिक समय भी लेती हैं. इन सीमाओं को दूर करने के लिए एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं द्वारा तेज नतीजे और किफायती विकल्प प्रदान करने वाली प्रणाली विकसित की गई है. यह एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग कार्बनिक और कुछ अकार्बनिक पदार्थों की पहचान के लिए किया जाता है. खाद्य परीक्षण के दौरान यह प्रणाली पैटर्न्स को एकत्र करती है और उन्हें मशीन लर्निंग मॉडल्स के माध्यम से प्रोसेस करती है.
ये मॉडल जटिल और गैर-रेखीय पैटर्न्स का विश्लेषण करके असामान्यताओं का पता लगाते हैं और मिलावट के स्तर का सटीक परिणाम देते हैं. पारंपरिक तरीके केवल यह बताते हैं कि खाद्य पदार्थ मिलावटी है या नहीं. वहीं, नई तकनीक कुछ ही सेकंड में मिलावट का स्तर भी माप सकती है. India का यह शोध प्रतिष्ठित फूड केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इसे एनआईटी राउरकेला के प्रो. सुशील कुमार सिंह (सहायक प्रोफेसर), दिवंगत प्रो. पूनम सिंघा, और एम.टेक. स्नातक ऋषभ गोयल द्वारा किया गया है.
इस शोध के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. सुशील कुमार सिंह ने बताया, “हमारा आविष्कार मसालों में मिलावट की पहचान करता है. हमने मौजूदा त्वरित पहचान उपकरणों को नवीन मशीन लर्निंग दृष्टिकोणों के साथ जोड़कर एक एकीकृत प्रणाली विकसित की है. इसमें प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता है. यह नवाचार न केवल खाद्य सुरक्षा और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में उपभोक्ता विश्वास को भी मजबूत करेगा. यह आविष्कार विशेष रूप से भारतीय बाजार में खाद्य उद्योग के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा.”
शोध टीम ने धनिया पाउडर में बुरादे (सॉडस्ट) की मिलावट पर भी कार्य किया. मशीन लर्निंग मॉडल्स और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी के संयोजन से टीम ने लगभग 92 प्रतिशत सटीकता के साथ मिलावट का पता लगाने वाला ढांचा विकसित किया.
इस प्रणाली के वास्तविक उपयोग के संदर्भ में प्रो. सिंह का कहना है कि खाद्य कंपनियों को कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक त्वरित मिलावट जांच की आवश्यकता होती है. यह प्रणाली उनके मौजूदा गुणवत्ता नियंत्रण ढांचे में आसानी से एकीकृत हो सकती है व रियल-टाइम निर्णय लेने में सहायता करती है. अगले चरण में शोध टीम उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर पायलट स्तर के अध्ययन करने और वास्तविक परिस्थितियों में इस प्रणाली को सत्यापित करने की योजना बना रही है.
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जीसीबी/डीकेपी