रिपब्लिकन सांसद ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल

वाशिंगटन, 27 मई . Pakistan खुद को शांति दूत के तौर पर स्थापित करने में जुटा है. अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की जिम्मेदारी उठा रहा है. इस बीच अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने ही Pakistan की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब्राहम अकॉर्ड के हवाले से इस्लामाबाद की नीयत को कठघरे में खड़ा किया है.

एक्स पर उन्होंने पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक साल पुराना पोस्ट टैग करते हुए कहा कि बतौर मध्यस्थ उन्हें शुरू से ही Pakistan पर भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा, “एक मीडिएटर के तौर पर Pakistan बहुत बड़ी प्रॉब्लम है.”

रिपब्लिकन ग्राहम के अनुसार, Pakistan का इजरायल के प्रति पुराना विरोध, नकारात्मक रुख और ईरानी सैन्य विमानों को Pakistanी एयरबेस पर जगह देने की खबरें चिंता बढ़ाने वाली हैं.

पोस्ट के जरिए ग्राहम ने कहा कि Pakistan को President ट्रंप को जल्द जवाब देना चाहिए कि अब्राहम अकॉर्ड्स (समझौते) में शामिल होगा या नहीं.

उन्होंने लिखा, “अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर डिफेंस मिनिस्टर की टिप्पणी एक साल पुरानी है. जिसमें उनका स्पष्ट मत था कि Pakistan कभी शामिल नहीं होगा क्योंकि उन्हें इजरायल पर भरोसा नहीं है. यह क्लिप एक साल पुरानी हो सकती है, लेकिन मुझे डर है कि यह भावना अभी भी जस की तस है.”

अब्राहम समझौता एक अहम कूटनीतिक समझौता है, जिसके तहत इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश की गई. इसकी शुरुआत सितंबर 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी. समझौते का मकसद मध्य पूर्व में शांति और सहयोग को बढ़ाना है, ताकि इजरायल और अरब देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सीधा संपर्क और सहयोग बन सके.

इस पहल के तहत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन ने सबसे पहले इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए. इसके बाद सूडान और मोरक्को भी इस प्रक्रिया से जुड़े.

“अब्राहम” नाम इसलिए चुना गया क्योंकि यह यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों धर्मों में साझा माने जाने वाले पैगंबर इब्राहिम से जुड़ा है, जो आपसी भाईचारे और शांति का प्रतीक माना जाता है.

हाल के वर्षों में अमेरिका ने, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल और उसके बाद की कूटनीतिक चर्चाओं में, सऊदी अरब और Pakistan जैसे देशों को भी इस समझौते में शामिल करने की कोशिशें तेज की हैं. हालांकि, अब तक इन देशों ने इजरायल को मान्यता देने से इनकार ही किया है.

केआर/

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