‘वंदे मातरम’ को लेकर जमीयत के मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा, ‘मुसलमानों पर न थोपें, सजा मंजूर है, मजहब से गद्दारी नहीं’

New Delhi, 11 अगस्त . लाल किले पर वंदे मातरम गाए जाने के मुद्दे पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदस्य मौलाना एजाज कश्मीरी ने से कहा कि जिसे पढ़ना है, पढ़े, लेकिन मुसलमानों पर इसे थोपा न जाए. वंदे मातरम की कुछ लाइनें उनके मजहब की बुनियाद से टकराती हैं, इसलिए वे इसे नहीं पढ़ सकते. हमें सजा मंजूर है, लेकिन हम वंदे मातरम नहीं पढ़ेंगे.

उन्होंने कहा, “यह मुल्क ऐसा है, जहां हर मजहब के लोग रहते हैं. कोई कुछ काम कर सकता है, कोई कुछ नहीं कर सकता है. जिनको वंदे मातरम पढ़ना दुरुस्त है, हमें उनसे कोई ऐतराज नहीं है. लाल किले पर पढ़ें, संसद में पढ़ें, लेकिन वंदे मातरम को लेकर, खासतौर पर मुसलमानों के साथ जबरदस्ती नहीं की जाए. वंदे मातरम में कुछ लाइन हमारे मजहब की बुनियाद से टकराते हैं. इसलिए हम नहीं पढ़ते हैं, बाकी जिन्हें पढ़ना है, पढ़ें, हमें कोई ऐतराज नहीं है.”

उन्होंने कहा कि यहां का कानून हमें अपने मजहब पर अमल करने का अधिकार देता है. ये लाइन हमारे मजहब और बुनियाद से टकरा रही है, कैसे हम मान लें? हुकूमत को ये सोचना चाहिए या मुल्क अपनी मर्जी से चलाना चाहती है, या संविधान की मर्जी से. अगर अपनी मर्जी से चला रहे हैं, तो ये तानाशाही है. मुसलमान ये नहीं कह रहे कि आप भी मत पढ़िए, आपको पढ़ना है, पढ़िए. हम अपने लिए कह रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के जो मायने होते हैं, मुसलमान खुदा के सिवा किसी की इबादत नहीं करता है. वैसे ही मुसलमान अपने मुल्क से मोहब्बत करता है. अगर Government मजबूर करेगी, तो ये बात तो पक्का है कि हमको सजा एक पल को मंजूर है, लेकिन गद्दारी न हम अपने मजहब से करेंगे, न अपने मुल्क से. उन्होंने मुस्लिम नेताओं के बयान पर कहा कि पहले भी राष्ट्रीय गीत की मान्यता नहीं दी गई थी, इसी बुनियाद पर कि इसमें कुछ बातें ऐसी हैं, जो मजहब से टकराती हैं. हिंदुस्तान में कानून ने हमें अपने मजहब को अमल करने का हक दिया है. अगर कोई मुस्लिम हमारे सामने पढ़ता भी है, तो हम उसे भी कुछ नहीं बोलेंगे. हुकूमत सख्ती बरतेगी, जेल में डालेगी, सजा देगी, लेकिन इसके बाद भी हम नहीं पढ़ेंगे. आप हमें सजा दे दीजिए, आप इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते. इसे पढ़ने से हमारा ईमान चला जाएगा.

मौलाना ने कहा, “Government जिनकी है, वो लाल किले पर वंदे मातरम पढ़वाएं या संसद में, उनकी मर्जी है. पढ़ने के लिए किसी को मजबूर न करें. हुकूमत खुद सोचे न, हम आपके किसी मजहबी मामले में ऐसा करते, तो कैसा लगेगा? ये हमारी बुनियादी चीज है. आज तक हुकूमत हमारे दूसरे मामलों में हस्तक्षेप करती आई है, लेकिन अब जो बुनियाद है वहां पर हमला कर रहे हैं. हम इसमें समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं.”

हर घर तिरंगा अभियान को लेकर उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारे मुल्क का झंडा है, हमारा फक्र है, मदरसे पर लगाओ, घर पर लगाओ, हमें कोई ऐतराज नहीं है. ये तो उन लोगों को सोचना चाहिए जो 50 सालों से तिरंगा नहीं लगाए थे. उन्हें सोचना चाहिए, जिनको आज भी तिरंगा लगाने में शर्म आती है. हमारे बाप-दादाओं ने इस मुल्क की आजादी के लिए कुर्बानी दी है. हमने तिरंगा मजबूर होकर नहीं लगाया है. हम दिल से अपने मुल्क से मोहब्बत करते हैं. उन्होंने मुस्लिम युवाओं और मदरसों से अपील की है कि सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को अपने मुल्क से मोहब्बत न करें, साल के 365 दिन टूटकर अपने मुल्क से मोहब्बत करें, तिरंगा लगाएं, हर वो काम करें, जिससे वतन की मोहब्बत आगे बढ़े.

केके/एबीएम

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