
कोलकाता, 11 अगस्त . पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है. तुलु मंडल पर तृणमूल कांग्रेस की पिछली Government के दौरान भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप हैं. फिलहाल Police को उसका कोई सुराग नहीं मिला है.
तुलु मंडल के खिलाफ पहले ही First Information Report दर्ज की जा चुकी है और जांच एजेंसियां उससे पूछताछ करना चाहती हैं. उसके फरार होने के कारण Police ने अदालत का रुख किया था.
Monday को Government ने तुलु मंडल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए आवेदन दाखिल किया था. बीरभूम जिले की सूरी अदालत ने Tuesday को इस आवेदन को मंजूरी दे दी.
Governmentी वकील विभास चटर्जी ने बताया कि तुलु मंडल को Friday, 14 अगस्त तक अदालत में पेश होने का समय दिया गया है. यदि वह तय समय के भीतर पेश नहीं होता है, तो उसे घोषित अपराधी माना जाएगा.
हाल ही में बीरभूम जिले के मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र के देउचा गांव में तुलु मंडल के रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से Police ने 28.5 करोड़ रुपए नकद बरामद किए थे. इसके अलावा करीब 15 किलोग्राम सोना भी मिला था. इसके बाद से ही जांच एजेंसियों ने तुलु मंडल पर निगरानी बढ़ा दी है.
Police उसकी संपत्तियों का पता लगाने के लिए लगातार छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही है. उसके विभिन्न ठिकानों के अलावा रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के घरों पर भी जांच की जा रही है.
Governmentी वकील ने कहा कि यदि तुलु मंडल अदालत में पेश नहीं होता, तो उसे घोषित अपराधी करार दिया जाएगा. इसके बाद उसकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.
तुलु मंडल पर आरोप है कि उसने पिछले पांच वर्षों में करीब 3,000 करोड़ रुपए के राजस्व की चोरी की है.
Monday को Police ने तुलु मंडल के रिश्तेदार रिपोन मंडल को गिरफ्तार किया था. जांचकर्ताओं ने पूर्व बर्दवान जिले के आउसग्राम स्थित उसके घर पर छापा मारा था. उसे Tuesday को सूरी अदालत में पेश किया गया.
Police ने गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपियों, शेख रियाजुल इस्लाम और शेख नूर आलम को भी अदालत में पेश किया और उनकी हिरासत की मांग की. अदालत ने तीनों आरोपियों को 10 दिनों की Police हिरासत में भेज दिया.
इन सभी के नाम कथित पत्थर सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं.
आरोपियों के वकील ने दलील दी कि केवल उनके मुवक्किलों को ही इस मामले में फंसाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उस समय प्रशासनिक पदों पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
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एएमटी/डीकेपी