
चंडीगढ़, 16 अगस्त . स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम विवाद को लेकर पूर्व Union Minister रवनीत सिंह बिट्टू ने Sunday को कांग्रेस और गांधी परिवार पर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार के लिए लोकतंत्र और संसद की कोई अहमियत नहीं है.
यह टिप्पणी कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने के समारोह के दौरान हुए एक घटनाक्रम के बाद सामने आई. दरअसल समारोह में जब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन किया जा रहा था, तब कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राष्ट्रगीत के बीच में बातचीत करते और इशारे करते देखा गया.
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेताओं पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम के पूरे गायन में बाधा डालने या उसे रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया, जिससे सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच एक नया Political टकराव शुरू हो गया.
भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने से बात करते हुए आरोप लगाया कि गांधी परिवार लोकतांत्रिक संस्थाओं या संसद को महत्व नहीं देता है.
पूर्व Union Minister ने कहा, “असलियत यह है कि राहुल गांधी इन बातों को आसानी से नहीं समझते, लेकिन माता जी (सोनिया गांधी) जल्दी समझ जाती हैं. उन्होंने सोचा होगा, ‘यह कांग्रेस का एजेंडा नहीं है. यह संसद द्वारा पारित देश का एजेंडा है. तो जो चीज हमने संसद में पारित नहीं की-वह मेरे सामने कैसे बजाई जा सकती है?’ क्योंकि, आखिरकार, यह गांधी परिवार है. उनके लिए जनता, संसद और लोकतंत्र की कोई अहमियत नहीं है.”
यह विवाद संसद द्वारा वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने और इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने या व्यवधान पैदा करने को दंडनीय अपराध बनाने वाला कानून पारित करने के कुछ समय बाद सामने आया है.
रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस नेतृत्व पर और निशाना साधते हुए राष्ट्रगीत को संसद की मंजूरी का हवाला दिया और पार्टी मुख्यालय में इसके गायन के दौरान सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए. “खुद जयराम रमेश ने माना है कि संसद ने सर्वसम्मति से यह बिल पास किया था. माताजी (सोनिया गांधी) नाराज हो गई थीं, हालांकि इतना गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नहीं है. यह देश का गीत है. जिस दिन हमने 80 साल पूरे किए यानी 15 अगस्त,उस दिन वह इस बात पर नाराज हो गईं. ठीक है, हम क्या कर सकते हैं? हालांकि अब उनके प्रवक्ता ने पार्टी का रुख बदल लिया है. हमारे लिए 15 अगस्त का दिन किसी भी अन्य त्योहार से कहीं ज्यादा पवित्र दिन है.”
उन्होंने इस घटना को कांग्रेस नेतृत्व का ‘वंदे मातरम’ और स्वतंत्रता दिवस समारोह के राष्ट्रीय महत्व से कटे होने का संकेत बताने की भी कोशिश की.
इस बीच, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से राष्ट्रगीत को बजाने या उसे पूरा गाने से रोकने की “कोई कोशिश” नहीं की गई थी.
इसके अलावा बिट्टू ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की उस टिप्पणी की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें “दिमागी Naxalite” होने पर गर्व है. यह टिप्पणी Prime Minister Narendra Modi द्वारा “दिमागी नक्सलवाद” को एक ऐसी चुनौती बताए जाने के एक दिन बाद आई, जो देश में हिंसा, अशांति और अव्यवस्था को बढ़ावा देने के मौके तलाशती रहती है.
बिट्टू ने को बताया, “पी. चिदंबरम (कांग्रेस सांसद) अब रिटायरमेंट की उम्र में हैं, लेकिन मेरा उनसे और उनकी पार्टी से एक सवाल है. जब वह केंद्रीय गृह मंत्री थे, वह थे, अब दोबारा नहीं बनेंगे-तो अगर आप रिकॉर्ड देखें, तो उनके कार्यकाल के दौरान ही Naxalite और माओवादी सबसे ज्यादा सक्रिय थे.”
रवनीत सिंह बिट्टू ने दावा किया,”उस दौरान Jharkhand, छत्तीसगढ़, Odisha, Maharashtra और आंध्र प्रदेश में जिस बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं, वैसी घटनाएं उसके बाद कभी नहीं हुईं. इसलिए बेहतर होगा कि वे (कांग्रेस) इस बारे में बात ही न करें.”
Prime Minister मोदी की टिप्पणी का समर्थन करते हुए बिट्टू ने यह भी कहा कि भले ही सशस्त्र माओवाद खत्म हो गया है, लेकिन कांग्रेस में अभी यह “मानसिकता” मौजूद है.
रवनीत सिंह बिट्टू ने Prime Minister Narendra Modi के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि India को नक्सलवाद से मुक्त करा देंगे और उन्होंने ऐसा किया भी, लेकिन दिमाग में नक्सलवाद अभी बाकी है. पी. चिदंबरम को दिक्कत हो रही है, क्योंकि ये चाहते हैं कि दुनिया में India की नक्सलवाद वाली पुरानी छवि बनी रहे. पीएम मोदी के नेतृत्व में आज नक्सलवादी क्षेत्रों का विकास हो रहा है और माओवादी आत्म समर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. कांग्रेस शासनकाल में इस तरह के क्षेत्रों को विकास से दूर रखा गया था.
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एएसएच/वीसी