राजस्थान हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज की

jaipur, 13 अगस्त . जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में Rajasthan हाई कोर्ट द्वारा पूर्व जल आपूर्ति मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज किए जाने से उन्हें बड़ा झटका लगा है.

अदालत ने पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल और इस मामले में कई अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं. Rajasthan हाई कोर्ट की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया.

यह मामला Rajasthan में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसमें कथित घोटाला लगभग 20,000 करोड़ रुपए का है.

महेश जोशी और पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के साथ-साथ अदालत ने संजय बडाया, महेंद्र प्रकाश सोनी, कृष्णदीप गुप्ता, संजीव कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार गौर और मुकेश पाठक सहित अन्य लोगों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं.

आरोपियों ने अदालत से राहत की गुहार लगाई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान पेश की गई दलीलों पर विचार करने के बाद पीठ ने जमानत देने से इनकार कर दिया.

सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अधिवक्ताओं नेहा गोयल, अमन अग्रवाल और विनोद कुमार शर्मा के साथ Rajasthan Government का प्रतिनिधित्व किया और जमानत आवेदनों का विरोध किया. राज्य ने तर्क दिया कि जल जीवन मिशन मामले में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और Governmentी पदों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप शामिल हैं.

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपों की प्रकृति और आरोपियों की कथित भूमिका को देखते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए. अंततः न्यायालय ने याचिकाएं खारिज कर दीं.

महेश जोशी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता स्नेहदीप ने तर्क दिया कि पूर्व मंत्री को First Information Report दर्ज होने के लगभग डेढ़ साल बाद गिरफ्तार किया गया था. बचाव पक्ष ने आगे कहा कि हालांकि जोशी अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच Enforcement Directorate की हिरासत में रहे, लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने उस दौरान उनकी हिरासत नहीं मांगी.

तत्कालीन एसई महेंद्र प्रकाश सोनी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सुधीर जैन ने तर्क दिया कि एक ही तथ्यों के आधार पर कई First Information Report दर्ज की गई थीं. उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म के निदेशकों को पहले ही राहत मिल चुकी है और उन्होंने दावा किया कि विस्तृत आरोपपत्र और कार्यवाही की प्रकृति के कारण मुकदमे में काफी समय लग सकता है.

जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी और अधिवक्ता अमन अग्रवाल ने तर्क दिया कि महेश जोशी विभाग के तत्कालीन प्रभारी मंत्री के रूप में संबंधित विभाग के प्रमुख थे और कथित तौर पर अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत से काम कर रहे थे.

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके तय दरों पर निविदाएं आवंटित की गईं और कहा कि इन आरोपों की न्यायिक जांच जारी रहनी चाहिए.

बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद, Rajasthan हाई कोर्ट ने महेश जोशी और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं.

एमएस/

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