
New Delhi, 3 अप्रैल . राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को संसद में उठाने के लिए जाने जाते हैं. उच्च सदन में उनके हस्तक्षेप अक्सर वायरल होते रहे हैं, क्योंकि वे पारंपरिक Political भाषणों के बजाय जनहित के व्यावहारिक मुद्दों पर फोकस करते रहे हैं.
राघव चड्ढा ने संसद में कई अहम मुद्दे उठाए, जिनमें हवाई अड्डों पर खाने-पीने की ऊंची कीमतें, खाद्य मिलावट से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं, गिग इकॉनमी व डिलीवरी कर्मियों का शोषण, टोल प्लाजा पर अधिक शुल्क और कथित लूट, बैंकिंग सेवाओं में आम ग्राहकों पर लगने वाले अतिरिक्त चार्ज, मिडिल क्लास और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर टैक्स का बोझ, बार-बार टेलीकॉम रिचार्ज, डेटा रोलओवर की कमी और अचानक सेवाएं बंद होना शामिल हैं.
इसके अलावा उन्होंने शिक्षकों, इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल क्रिएटर्स के अधिकारों की सुरक्षा, पंचायतों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे (जैसे ‘सरपंच पति’ प्रथा) और खराब प्रदर्शन करने वाले जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने (राइट टू रिकॉल) की मांग भी उठाई.
इन सबके बावजूद, आम आदमी पार्टी ने Thursday को आधिकारिक रूप से राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया कि वरिष्ठ नेता अशोक कुमार मित्तल को पार्टी का डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया है, जो राघव चड्ढा की जगह लेंगे.
अपने हटाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने पहले ‘एक्स’ पर सवाल उठाया था कि उन्हें संसद में बोलने से क्यों रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल आम लोगों के मुद्दे उठाए हैं और उनकी चुप्पी को उनकी हार न समझा जाए.
इस घटनाक्रम के बाद Political गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या संसद में आक्रामक तरीके से जनहित के मुद्दे उठाना ही पार्टी के भीतर कार्रवाई की वजह बन गया है.
राघव चड्ढा युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच अपनी बेबाक शैली के लिए खासे लोकप्रिय हैं. उनके समर्थकों का मानना है कि पार्टी को ऐसे नेताओं को प्रोत्साहित करना चाहिए, जो सीधे आम जनता से जुड़ते हैं.
हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस बदलाव के पीछे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पार्टी आंतरिक बदलावों और भविष्य की Political रणनीति पर काम कर रही है.
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डीएससी