
चंडीगढ़, 25 अप्रैल . शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने Saturday को पंजाब के Chief Minister भगवंत मान के उस फैसले को ‘सियासी ड्रामा’ बताया, जिसमें उन्होंने President से मिलकर उन राज्यसभा सांसदों को वापस बुलाने की मांग की है, जो पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे.
अकाली दल ने सीएम को याद दिलाया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार संसद के पास है, न कि President के विवेक पर निर्भर है.
पार्टी के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने जारी एक बयान में कहा कि दलबदल विरोधी कानून बिल्कुल साफ है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय कर लेते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती.
चीमा ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने एसएडी के तीन विधायकों में से एक के ‘आप’ में शामिल होने को मंजूरी दी थी, और उस विधायक को एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का चेयरमैन भी बना दिया था.
अकाली दल के नेता ने कहा कि ऐसे उपाय खोजने से पहले, जो संवैधानिक रूप से मौजूद ही नहीं हैं, ‘आप’ को यह समझाना चाहिए कि उसने पंजाब के असली ‘आम आदमी’ प्रतिनिधियों के बजाय, बेहद अमीर ‘बाहरी लोगों’ को राज्यसभा के लिए क्यों नामित किया? चीमा ने पूछा कि लोगों को भी यह साफ तौर पर जानने का हक है कि अगर ‘जवाबदेही’ ही मुख्य सिद्धांत है तो क्या नागरिकों को उन विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार है, जिन्होंने उन्हें निराश किया है? या फिर आपकी जवाबदेही सिर्फ चुनिंदा मामलों में ही लागू होती है?
उन्होंने कहा कि अगर पार्टी सचमुच लोकतांत्रिक नैतिकता में विश्वास रखती है तो उसे पंजाब के ‘लोक भवन’ जाना चाहिए और Governor से नए सिरे से जनादेश (चुनाव) की मांग करनी चाहिए. सिर्फ इसी तरीके से न कि सिर्फ संवैधानिक दिखावा करने से पार्टी में जनता का विश्वास फिर से बहाल हो पाएगा.
Chief Minister भगवंत सिंह मान ने President द्रौपदी मुर्मु से मिलने के लिए समय मांगा है. वह अपने पार्टी विधायकों के साथ मिलकर उन सात राज्यसभा सदस्यों को वापस बुलाने के मुद्दे पर अपना पक्ष रखना चाहते हैं, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हो गए हैं.
यह घटनाक्रम उस दिन के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जब ‘आप’ के सात राज्यसभा सदस्यों राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी ने ‘आप’ छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले की घोषणा की थी. स्वाति मालीवाल के अलावा, छह अन्य सांसद उच्च सदन में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं.
चूंकि ‘आप’ के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात ने दो-तिहाई बहुमत के साथ एक साथ पार्टी बदल ली है, इसलिए उनमें से किसी पर भी संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे आमतौर पर दलबदल विरोधी कानून के नाम से जाना जाता है) के तहत अयोग्यता का खतरा होने की उम्मीद नहीं है.
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एएसएच/डीकेपी